कुणाल सिंह की विरासत और नए दौर के सुपरस्टार:-
क्यों टूट गया भोजपुरी सिनेमा का सुनहरा सपना ?
भोजपुरी सिनेमा के पहले सुपरस्टार कुणाल सिंह ने जिस उम्मीद और सम्मान के साथ इस इंडस्ट्री को नई पहचान दी थी।
वह आज भी एक मिसाल है।
उनकी फिल्में केवल मनोरंजन नहीं थीं।
बल्कि सामाजिक सरोकार, संगीत की मिठास और साफ़-सुथरी प्रस्तुति का मेल थीं।
कुणाल सिंह ने यह साबित किया कि भोजपुरी सिनेमा भी स्तर और गरिमा के साथ खड़ा हो सकता है।
लेकिन उनके बाद आए दूसरे दौर के सुपरस्टार — रवि किशन, मनोज तिवारी, दिनेश लाल यादव निरहुआ, पवन सिंह और खेसारी लाल यादव — उस विरासत को पूरी तरह संभाल नहीं पाए।
इन कलाकारों की लोकप्रियता और मेहनत पर सवाल नहीं है, पर उनकी फिल्मों ने धीरे-धीरे कंटेंट से ज़्यादा कमर्शियल फार्मूले को प्राथमिकता दी।
पारिवारिक दर्शक, सामाजिक संदेश और सशक्त कहानी कहीं न कहीं पीछे छूटते चले गए।
स्टारडम तो बढ़ा, लेकिन सिनेमा की आत्मा कमजोर होती गई।
गानों में अश्लीलता, पटकथाओं में दोहराव और त्वरित कमाई की सोच ने उस भरोसे को तोड़ा जो कभी कुणाल सिंह के नाम से जुड़ा था।
आज ज़रूरत है कि नए और पुराने स्टार मिलकर फिर से उसी विरासत को समझें और भोजपुरी सिनेमा को सम्मान की राह पर लौटाएँ।
स्थानीय संवाददाता……

