भ्रष्टाचार के चलते वन विभाग की सारी व्यवस्था फेल
जनपद भर में नहीं रुक रहा हरी लकड़ी का कटान
रोजाना नीम, आम जैसे सैकड़ों वृक्षो पर चल रहा भ्रष्टाचार
कासगंज।हरे पेड़ पौधे ऑक्सीजन देते है। और कार्वन-डाई-आँक्साइड लेते है। यह प्रकृति का नियम है।हरे भरे पेड़ पौधो के कारण ही वर्षा होती है। जिससे पीने के लिए पानी मिलता है।यदि हरे भरे पेड़ पौधों को ही नष्ट कर दिऐ जायेगे तो मानव जीवन और जीव जन्तु को जीना दुस्बार हो जायेगा।इसी के चलते हरे भरे पेड़ पौधों को काटने से सरकार भी रोकती है।जब पेड़ पौधे ही नहीं रहेगें तो मानव को जीवन जीना कठिन हो जायेगा।जरूरत के लिए यदि कोई भी हरा पेड़ काटता है। तो उसके बदले में दो पौधे अवश्य लगाता है।हरे पेड़ पौधों को काटने से रोकने के लिए सरकार ने वन विभाग की व्यवस्था की है जिससे वन विभाग के अधिकारी कर्मचारी हरे पेड़ काटने से रोकें और मानव जीवन चलता रहे।सरकार ने कुछ ऐसे पेड़ है। जिनको काटने के लिए छूट भी दे रखी है। जिसमें पोपूलर, यूकेलिपिस्ट, पापरी, बकेना, जैसे कई पेड़ पौधे ऐसे है। जिन्हें काटने से मानव अपने जीवन की अन्य जरूरते भी पूरी कर सकता है।जनपद में लगभग दो वर्ष पूर्व भी गंगा वन और भागीरथ वन की स्थापना की।जिसमें सरकार का कारोड़ों रुपया खर्चा आया।लेकिन जनपद भर में लकड़ी माफिया सक्रिय है।वन विभाग की साठ-गांठ से जनपद भर में हरे भरे पेड़ पौधों को काट कर खत्म किया जा रहा है।लकड़ी के ठेकेदार सैकड़ों की तादात में हरे भरे पेड़ पौधे काटते है और लकड़ी को बेचकर मोटी रकम पैदा करते है।जिसमें पूरा सहयोग वन विभाग का रहता है, यदि वन विभाग को सूचना भी दी जाती है तो वन विभाग के अधिकारी पहले से ही लकड़ी माफियाओं को बता देते है।लकड़ी माफिया वन विभाग को रुपये देकर मुंह बंद कर देते है।जिससे वन विभाग लकड़ी माफियाओं पर कोई भी कार्यवाही नही करता है।लकड़ी माफिया इतने शातिर है कि वन विभाग से दो य तीन पेड़ काटने की परिमीशन लेते है और 10-15 पेड़ काटते है, ये सब वन विभाग की मिली भगत से ही संभव है, नहीं तो बन विभाग हरे पेड़ काटने के लिए परिमीशन देगा तो पहले हरे पेड़ का मेडीकल करायेगा कि पेड़ फल दे रहा है या नहीं या कोई और वीमारी तो नहीं है।लेकिन जनपद के वन विभाग में भ्रष्ट व्यवस्था के चलते वन विभाग की सारी व्यवस्था फेल है।

