*भारत में चिनाब नदी पर बांध और सुरंग से संकट में पाकिस्तान,आइए समझें 5 पॉइंट*
नई दिल्ली।सिंधु जल संधि पर भारत की रोक से आतंकीस्तान पाकिस्तान पहले से ही घायल सांप की तरह तिलमिलाया बैठा है।अब भारत इस संधि से जुड़ी नदी पर एक परियोजना शुरू करने जा रहा है।
इस परियोजना से पाकिस्तान घबरा गया है।
भारत ने हिमाचल प्रदेश में चिनाब-ब्यास लिंक टनल बनाने का फैसला किया है और जल्द ही काम शुरू होगा।
पाकिस्तान ने इस प्रोजेक्ट को पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए खतरनाक बताया है।
पाकिस्तान इस प्रोजेक्ट को लेकर परेशान में क्यों है।
आइए 5 पॉइंट में समझते हैं।
*क्या है चिनाब टनल प्रोजेक्ट*
भारत चिनाब नदी पर एक टनल बना रहा है,इसका उद्येश्य चिनाब नदी के अतिरिक्त पानी को ब्यास नदी के बेसिन में मोड़ना है।यह सुरंग चिनाब नदी की ऊपरी धारा पर बनाई जाएगी।
19 लाख एकड़ फीट पानी ब्यास नदी में भेजा जाएगा।
इसके साथ ही भारत एक और प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है।
जो सलाल बांध पर गाद को मैनेज करने की क्षमता को फिर से बहाल करने को लेकर है।
इन दोनों प्रोजेक्ट की कुल लागत 2600 करोड़ रुपये है।
*चिनाब प्रोजेक्ट से पाकिस्तान परेशान*
पाकिस्तान की परेशानी समझने के लिए पहले सिंधु जल संधि को समझना जरूरी है।
1960 में स्थापित इस संधि के तहत भारत और पाकिस्तान के बीच नदियों का बंटवारा किया गया है।
संधि के मुताबिक पूर्वी नदी रावी,सतलुज और ब्यास भारत के हिस्से में आई हैं।
जबकि तीन पश्चिमी नदियां सिंधु,चिनाब और झेलम पाकिस्तान के हिस्से आई हैं।
*सिंधु जल संधि के भविष्य पर सवाल*
भारत ने पिछले साल ही पाकिस्तान के साथ जल संधि को स्थगित कर दिया था और अब चिनाब नदी का पानी मोड़ रहा है।
यह प्रोजेक्ट सिंधु जल संधि के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैंं।पाकिस्तान इसी को लेकर बौखलाया हुआ है।
पाकिस्तान का कहना है कि चिनाब नदी के पानी पर उसका हक है और भारत जबरन इसे मोड़कर अपने हिस्से वाली ब्यास नदी में मोड़ रहा है।
गुरुवार को पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी और इसे संधि का उल्लंघन बताया।पाकिस्तान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने कहा कि हमने यह मीडिया रिपोर्ट और भारत सरकार द्वारा चिनाब-ब्यास लिंक प्रोजेक्ट के लिए जारी किया गया पब्लिक टेंडर डाक्यूमेंट देखा है।
जिसका मकसद चिनाब नदी से ब्यास नदी में 19 लाख एकड़ फीट पानी ट्रांसफर करना है।
इस तरह का इंटर बेसिन प्रोजेक्ट सिंधु जल संधि का गंभीर उल्लंघन है।
*चिनाब लिंक टनल पर जल्द शुरू होगा काम*
भारत ने पिछले साल अप्रैल में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया था।
भारत ने कहा है कि वह चिनाब समेत तीनों पश्चिमी नदियों पर अपने हक के पानी का इस्तेमाल करेगा।
इसके बाद से चिनाब नदी पर कई परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया गया है।
चिनाब-ब्यास लिंक प्रोजेक्ट भारत की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजना है।
जिस पर काम इसी साल 1 अगस्त से शुरू करने की योजना है।
8.7 किमी लंबी इस इंटर वॉटर बेसिन टनल परियोजना के लिए 31 जुलाई 2029 की सीमा तय की गई है।
*भारत पर संधि के उल्लंघन का आरोप*
पाकिस्तान के पूर्व सीनेटर और पंजाब प्रांत के सिंचाई मंत्री मोहसिन लगारी ने हाल ही एक लेख में इस प्रोजेक्ट पर सवाल उठाए थे।लगारी ने कहा कि नदी के पानी को मोड़ना संधि का गंभीर उल्लंघन है।लगारी ने कहा कि आप किसी नदी के पानी को दूसरी नदी के बेसिन में थोड़ा सा भी नहीं मोड़ सकते हैं।
लगारी ने नदी प्रणालियों के बंटवारे को इस संधि की नींव बताया और इस प्रोजेक्ट को संधि की मूल भावना के खिलाफ कहा।

