सैलून बना ‘कुरुक्षेत्र’: जब खूबसूरती की चाहत ‘बदसूरती’ में बदल गई
लखनऊ। नवाबों के शहर लखनऊ में तहजीब की जगह अब ‘मुक्केबाजी’ ने ले ली है, और वह भी किसी स्पोर्ट्स रिंग में नहीं बल्कि एक ब्यूटी सैलून में।
जहाँ लोग खुद को संवारने जाते हैं, वहां दो युवतियों ने एक-दूसरे का हुलिया बिगाड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
कहासुनी से ‘रणक्षेत्र’ तक
बात मामूली कहासुनी से शुरू हुई थी।
शायद मुद्दा यह रहा होगा कि ‘पहले मेरा नंबर’ या ‘मेरा आईब्रो ज्यादा अच्छा बनना चाहिए’।
लेकिन देखते ही देखते शब्दों की मर्यादा तार-तार हो गई।
गालियां ऐसी कि कान शर्मा जाएं और तेवर ऐसे कि किसी प्रोफेशनल रेसलर को भी मात दे दें।
असहज ‘शांतिदूत’
वीडियो में एक युवक बीच-बचाव की नाकाम कोशिश करता दिख रहा है।
लेकिन जोश इतना हाई था कि उसे भी समझ आ गया होगा कि ‘दो देवियों’ के युद्ध में कूदना अपनी सेहत के लिए ठीक नहीं है।
दोनों युवतियां एक-दूसरे पर ऐसे चढ़ बैठी थीं जैसे लखनऊ की कोई ऐतिहासिक जीत इसी सैलून के अंदर तय होनी हो।
सामाजिक आईना
यह घटना सिर्फ एक झगड़ा नहीं, बल्कि समाज के उस बदलते चेहरे की ओर इशारा करती है जहाँ धैर्य (Patience) नाम की चीज़ खत्म होती जा रही है।
क्या खूबसूरती सिर्फ चेहरे की चमक तक सीमित है?
क्या हमारी जुबान और व्यवहार की शालीनता अब गुजरे जमाने की बात हो गई है?
सैलून में शीशे तो नहीं टूटे, लेकिन उस दिन लखनऊ की ‘नजाकत’ और ‘तहजीब’ का आईना जरूर चकनाचूर हो गया।
अगली बार जब आप सैलून जाएं, तो केवल चेहरा चमकाने का सामान न ले जाएं, थोड़ा धैर्य भी साथ रखें, वरना आप भी किसी वायरल वीडियो का ‘कलंकित’ हिस्सा बन सकते हैं।

