पूर्वांचल पत्रकार सम्मेलन में गूंजा सच का स्वर: निष्पक्ष पत्रकारिता को बताया लोकतंत्र की आत्मा
मऊ……. बदलते दौर में पत्रकारिता के सामने खड़ी चुनौतियों और उसके दायित्वों को लेकर रविवार को मऊ के सभागार में आयोजित पूर्वांचल स्तरीय पत्रकार सम्मेलन, विचार गोष्ठी “पत्रकारिता—आज और कल” और अभिनंदन समारोह एक सशक्त विमर्श का मंच बन गया।
राष्ट्रीय पत्रकार संघ भारत के तत्वावधान में हुए इस आयोजन में पूर्वांचल ही नहीं, बल्कि बिहार और मध्य प्रदेश से भी बड़ी संख्या में प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया के पत्रकारों की सहभागिता ने इसे एक व्यापक आयाम प्रदान किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना, दीप प्रज्ज्वलन और अतिथियों के माल्यार्पण के साथ हुआ।
मुख्य अतिथि पूर्व सांसद अतुल राय ने अपने संबोधन में पत्रकारिता के मूल्यों पर जोर देते हुए कहा कि “पत्रकारिता केवल चौथा स्तंभ नहीं, बल्कि लोकतंत्र की आत्मा है।”
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आज जब मीडिया पर राजनीतिक और कॉरपोरेट दबाव बढ़ रहा है।
तब पत्रकारों के लिए सबसे बड़ी कसौटी सत्य और तथ्य के साथ खड़े रहना है।
उन्होंने ग्रामीण अंचलों में कार्यरत पत्रकारों के लिए प्रशिक्षण, संस्थागत सहयोग और कानूनी संरक्षण को अनिवार्य बताते हुए कहा कि समाज के कमजोर वर्गों की आवाज बनना ही पत्रकारिता की असली पहचान है।
गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे राष्ट्रीय अध्यक्ष जगदीश सिंह ने डिजिटल युग की चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सूचना क्रांति के इस दौर में खबरों की बाढ़ है।
लेकिन सत्य की पहचान करना पहले से अधिक कठिन हो गया है। उन्होंने फेक न्यूज, ट्रोल संस्कृति और आर्थिक दबाव को पत्रकारिता की स्वतंत्रता के लिए बड़ा खतरा बताया और पत्रकारों की सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा के लिए ठोस व्यवस्था, बीमा और कानूनी संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया।
विशिष्ट अतिथि सगड़ी/मधुबन विधायक एच.एन. सिंह पटेल ने पत्रकारों की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि “आप केवल खबर नहीं लिखते, बल्कि सरकारों की दिशा तय करते हैं।”
उन्होंने पत्रकारों से अपील की कि वे सत्ता के प्रभाव से दूर रहकर जमीनी मुद्दों को प्राथमिकता दें।
क्योंकि वही लोकतंत्र की असली ताकत है।

नगर पालिका अध्यक्ष अरशद जमाल ने अपने संबोधन में पत्रकारों और वकीलों को समाज की सशक्त आवाज बताते हुए कहा कि वर्तमान समय में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बढ़ते दबाव के बीच इनकी भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
उन्होंने स्थानीय निकायों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए मीडिया की रचनात्मक आलोचना का स्वागत किया और भरोसा दिलाया कि पत्रकारों को सूचना और सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए ठोस व्यवस्था बनाई जाएगी।
गोष्ठी के दौरान वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि पत्रकारिता को जाति और धर्म की सीमाओं से ऊपर उठकर कार्य करना होगा।
साथ ही पत्रकारों से अपील की गई कि वे ‘गोपनीय अधिनियम की धारा 03-04’ और ‘भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 173 व 173(3)’ का गहन अध्ययन करें, ताकि पुलिस प्रशासन की लापरवाही के खिलाफ प्रभावी तरीके से आवाज उठाई जा सके।
पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग भी जोर-शोर से उठी।
इस अवसर पर सैकड़ों पत्रकारों को अंगवस्त्र, स्मृति चिन्ह और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
संगठनात्मक विस्तार के तहत बलिया के वरिष्ठ पत्रकार शब्बीर अहमद को पूर्वांचल प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया।
जबकि गाजीपुर, आजमगढ़ और गोरखपुर में भी नए जिलाध्यक्षों की घोषणा की गई।
कार्यक्रम की एक विशेष झलक तब देखने को मिली जब विभिन्न प्रकोष्ठों के पदाधिकारियों और संत समाज के प्रतिनिधियों ने वर्चुअल माध्यम से अपनी सहभागिता दर्ज कराई और आयोजन की सराहना की।
कार्यक्रम में डॉ. विवेक सिंह और डॉ. ओ.पी. सिंह को विशेष सम्मान प्रदान किया गया।
समापन के साथ यह संदेश स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आया कि पत्रकारिता की विश्वसनीयता ही उसकी सबसे बड़ी पूंजी है।
यदि पत्रकार सत्य और निष्पक्षता के साथ डटे रहें।
तो………
लोकतंत्र की जड़ें और मजबूत होंगी।

