आज की तस्वीर में हमारे साथ हैं हमारे संघर्षों के दिन के एक और साथी……
हमारे परम मित्र तथा हमारे मार्गदर्शक दिलीप यादव जी ( सचिव जी)….. ग्राम पंचायत फुलेरा वाले नहीं🥰🥰🥰🥰 फिलहाल बलिया में नरही में कहीं तैनात है ।
हमारी और दिलीप की मुलाकात उत्तर प्रदेश पुलिस में ट्रेनिंग के दौरान जनपद बाँदा में हुई ।
हम और दिलीप ट्रेनिग के दौरान एक ही टोली में हो गए थे ।
मेरी तरह दिलीप भी मध्य प्रदेश पुलिस की नौकरी छोड़कर उत्तर प्रदेश पुलिस की नौकरी ज्वाइन किए थे।
दिलीप का किताबों से बड़ा लगाव था …..दिलीप अपने निजी सामान से ज्यादा किताबों को साथ लेकर रहते थे….. दिलीप का ट्रेनिंग का बक्सा सामान से ज्यादा किताबों से भरा हुआ होता था ।
ट्रेनिंग के बाद हम दोनों की पोस्टिंग , एक ही थाने , थाना चिल्ला में हो गई ।
हम और दिलीप एक ही रूम में रहने भी लगे ,तथा एक ही साथ यूपीएसआई परीक्षा की तैयारी में भी लग गए ।
दिलीप हमसे ज्यादा पढ़ने में अच्छा और हमसे ज्यादा मेहनती भी था…. दिलीप की सबसे अच्छी आदत थी की दिलीप की किताब हमेशा खुली रहती थी आंख भले बंद हो जाए
🥰🥰🥰 यह कहानी लगभग रोज रात की होती थी कि ….. दिलीप पढ़ते-पढ़ते हाथ में किताब लेकर ही सो जाते थे तो मैं उनकी किताब रखकर इनको ढंग से सुलाता था……
हालांकि यूपीएसआई में मुझसे काफी ज्यादा नंबर होने के बावजूद भी नार्मलाइजेशन में नंबर घट जाने के कारण दिलीप का यूपीएसआई में सिलेक्शन नहीं हो सका…..
बाद में दिलीप का सिलेक्शन UP VDO में हो गया और वर्तमान में ग्राम पंचायत सचिव के रूप में जनपद बलिया में सेवा दे रहे है । …… नौकरी के दौरान समय निकालकर कैसे पढ़ना है यह मैंने दिलीप के साथ ही सीखा ।

