उत्तर प्रदेश के बरनवाल जाति को पिछड़ा वर्ग का आरक्षण जरूरी क्यों?
1. बरनवाल समाज के अधिकांश लोग छोटे-छोटे काम जैसे दुकानदारी, फेरी लगाना, कबाड़ बीनना/खरीदना, ठेले पर फल-सब्जी बेचकर गुजर-बसर करते हैं और एक शापित जिंदगी जी रहे हैं। बरनवाल जाति की राजनीतिक भागीदारी लगभग शून्य है, जबकि प्रशासनिक सेवाओं में भी बरनवाल जाति की स्थिति दयनीय है। बरनवाल समाज सामाजिक एवं आर्थिक रूप से भी संघर्ष करता नजर आता है। उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, बंगाल, असम, राजस्थान, दिल्ली, मध्य प्रदेश आदि राज्यों में फैला हुआ है।
2. यह कि बरनवाल समाज को बिहार और झारखंड प्रदेश में राज्य स्तर पर आरक्षण है। यदि उत्तर प्रदेश या किसी भी अन्य एक प्रदेश में बरनवाल समाज पिछड़ा वर्ग में शामिल हो जाता है, तो बरनवाल समाज पिछड़ा वर्ग की केंद्रीय सूची में शामिल हो जाएगा, जो बरनवाल समाज के लिए उपलब्धियों का दरवाजा खोल देगा।
3. पिछड़ा वर्ग में शामिल होने के उपरांत शिक्षा क्षेत्र में संघर्षशील छात्रों को कोटा का लाभ मिलने लगेगा, जो उनके सपनों को साकार करेगा।
4. सरकारी सेवा दे रहे लोगों में (प्रमोशन/पदोन्नति) का मार्ग खुल जाएगा, उनका रुका हुआ चक्र चल पड़ेगा।
5. विद्यार्थियों को फॉर्म भरने में भी आर्थिक लाभ और उम्र का लाभ मिलेगा।
6. राजनीतिक सोच के लोगों को पंख लग जाएंगे, क्योंकि बरनवाल समाज भी सवर्ण समाज के साथ घुला-मिला है। उनसे हमारे संबंध अच्छे हैं और सवर्ण समाज हमारे विशेष सहयोगी हैं, किंतु हम भी सवर्ण समाज में आते हैं। जब भी चुनाव की बात आती है और जब हम चुनाव लड़ना चाहते हैं, राजनीतिक पद-प्रतिष्ठा और मान-सम्मान के लिए संघर्ष करने के लिए आगे आते हैं, तब हम सवर्ण समाज से अलग पड़ जाते हैं और अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा तथा उसके परिणाम से डरकर अपना कदम पीछे खींच लेते हैं।
यही सबको ध्यान देना होगा कि बरनवाल समाज पिछड़ा वर्ग आरक्षण हासिल कर लेने के बाद जब चुनावी समर में O.B.C. पिछड़ा वर्ग में उतरेगा, तो यही सवर्ण समाज बरनवाल समाज को अपना मानकर पूरा सहयोग एवं समर्थन देगा, जिसके परिणामस्वरूप हमारे बरनवाल समाज में मुखिया, प्रधान, B.D.C., जिला-पंचायत सदस्य, सभासद, चेयरमैन आदि बनने लगेंगे, राजनीतिक पृष्ठभूमि बनेगी और सर्वसमाज में बरनवाल समाज की स्वीकार्यता बढ़ जाएगी।
पिछड़ा वर्ग में शामिल होने के लिए देश-प्रदेश में परिस्थितियां भी पक्ष में हैं, क्योंकि देश-प्रदेश में अधिकांश जगहों पर B.J.P. की या समर्थित सरकार है और बरनवाल समाज हमेशा से B.J.P. को सहयोग, समर्थन, नोट और वोट देकर शिखर तक लाया है। तो क्या एक छोटा-सा काम की मांग नहीं मनवा सकता है? जबकि हर जिला-कस्बे में कमोबेश B.J.P. नेता के संपर्क में हैं। लेकिन दुर्भाग्यवश कुछ लोग पिछड़ा वर्ग में शामिल होने को अपनी तौहीन समझते हैं, जबकि उन्हें यह समझना चाहिए कि वे अपने बरनवाल समाज के भविष्य से खिलवाड़ कर रहे हैं।
बरनवाल समाज को पिछड़ा वर्ग में शामिल करने के लिए बरनवाल सेवा समिति, देवरिया द्वारा दिनांक 12/08/2025 को माननीय मंत्री, उत्तर प्रदेश पिछड़ा वर्ग श्री नरेंद्र कश्यप जी व जिलाधिकारी देवरिया को ज्ञापन दिया गया। तत्पश्चात M.L.C. माननीय रतन पाल सिंह जी एवं देवरिया सदर विधायक मा० शलभ मणि त्रिपाठी जी को ज्ञापन देकर बरनवाल समाज को पिछड़ा वर्ग में शामिल करने की मांग की गई।
प्रदेश की सभी बरनवाल सेवा समितियों से निवेदन किया गया कि वे अपने समिति के पैड पर प्रिंट निकालकर जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपकर मांग को मजबूत करें और सफल बनाएं। सहयोग और अपने समाज के मान-सम्मान तथा बच्चों के भविष्य के लिए किसी भी समिति की तरफ से एक कदम नहीं उठाया गया।
प्रभुत्ववादी एवं उनके संगी-साथी सदैव आरक्षण के विरुद्ध रहे। सदियों की पीड़ा, नकारात्मक सहयोग और सबकी बराबरी के सिद्धांत को स्वीकार नहीं किया गया। बरनवाल समाज के शोषित, वंचित और पीड़ित लोग सामाजिक सोपान पर हमेशा नीचे ही रहे हैं, लेकिन अब समय आ गया है कि उनके आत्मसम्मान और आत्मविश्वास की स्थापना की जाए।
अंत में हम यही कहना चाहते हैं कि सबके संभव प्रयास और सूझ-बूझ से बरनवाल समाज को पिछड़ा वर्ग में शामिल कर लिया गया, तो बरनवाल समाज भी इस देश में प्रशासनिक सेवा से लेकर राजनीति सहित सभी क्षेत्रों में अपना ध्वज लहराएगा।
राजनीति इस भौतिक जगत की परम सत्ता है और सभी समस्याओं को हल करने की चाबी है। इसी से बरनवाल समाज और महाराजा अहिबरन जी का सपना साकार होगा।
“जो संघर्ष को धर्म बना लेगा, निश्चित उत्कर्ष को पा लेगा।
अंधियारा दूर करेगा वह, जो दीपक एक जला लेगा।”
भवदीय
अभय नंदन बरनवाल
अध्यक्ष, बरनवाल सेवा समिति (देवरिया)

