केरला अब होगा “केरलम”:-
केंद्र कैबिनेट की मंजूरी
ऐतिहासिक पहचान को मिलेगा आधिकारिक दर्जा
नई दिल्ली……..
28फरवरी 2026
केंद्र सरकार की कैबिनेट ने मंगलवार को बड़ा फैसला लेते हुए केरल राज्य का आधिकारिक नाम “Kerala” से बदलकर “Keralam” (केरलम) करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। यह निर्णय राज्य सरकार की सिफारिश पर लिया गया है।
जिसका उद्देश्य स्थानीय भाषा और सांस्कृतिक पहचान को संवैधानिक मान्यता दिलाना है।
“केरलम” (കേരളം) मलयालम भाषा में राज्य का पारंपरिक और प्रचलित नाम है।
राज्य के लोग रोजमर्रा की बातचीत में इसी नाम का उपयोग करते हैं।
अब इसी नाम को आधिकारिक दस्तावेजों में दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू होगी।
नाम का अर्थ और ऐतिहासिक संदर्भ
“केरलम” शब्द की उत्पत्ति को लेकर दो प्रमुख मान्यताएं प्रचलित हैं:
“केरा” + “अलम”
मलयालम में “केरा” का अर्थ नारियल का पेड़ और “अलम” का अर्थ भूमि या क्षेत्र है।
इस तरह “केरलम” का अर्थ हुआ — नारियल के पेड़ों की भूमि।
इतिहासकारों के अनुसार यह नाम प्राचीन चेरा साम्राज्य से जुड़ा है। जो दक्षिण भारत का प्रमुख राजवंश था।
सम्राट अशोक के शिलालेखों में “केरलपुत्र” का उल्लेख भी इस क्षेत्र की प्राचीन पहचान को दर्शाता है।
साल 2023 में मुख्यमंत्री Pinarayi Vijayan के नेतृत्व में केरल विधानसभा ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर संविधान की पहली अनुसूची में “Kerala” की जगह “Keralam” दर्ज करने की मांग की थी।
2024 में राज्य सरकार ने यह प्रस्ताव केंद्र को पुनः भेजा। अब 24 फरवरी 2026 को केंद्र कैबिनेट की मंजूरी के बाद प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
क्यों जरूरी समझा गया बदलाव?
मलयालम भाषा और स्थानीय अस्मिता को मजबूत करना
राज्य के मूल और पारंपरिक नाम को आधिकारिक दर्जा देना है।
1956 में भाषाई आधार पर राज्य गठन की भावना के अनुरूप कदम
राज्य सरकार का मानना है कि “Keralam” नाम राज्य की सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक पहचान को बेहतर तरीके से अभिव्यक्त करता है।
आगे की प्रक्रिया
हालांकि कैबिनेट ने प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
लेकिन नाम परिवर्तन को पूरी तरह लागू करने के लिए संवैधानिक संशोधन और अधिसूचना की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
इसके बाद केंद्र और राज्य सरकार के सभी आधिकारिक दस्तावेजों, सरकारी रिकॉर्ड, संकेतकों और संचार माध्यमों में “Keralam” नाम का उपयोग शुरू होगा।
“केरलम” कोई नया नाम नहीं, बल्कि सदियों से प्रचलित स्थानीय नाम है।
अब इसे आधिकारिक मान्यता मिलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।
यह निर्णय राज्य की भाषाई और सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर सशक्त करने वाला माना जा रहा है।

