पुलिस की कस्टडी में खड़ा किशन चौहान एक शातिर चोर नही बल्कि कानून की किताब में एक राह से भटका नवयुवक बना हुआ है
इसलिये ट्रेनों में चोरी करने वाला यह चोर जिस पर 4 साल में आठ मुकदमे भले ही दर्ज है
इसको पकड़ने के लिए पुलिस सिर से नख तक पसीने से लथपथ भले ही हो जाती है पर यह शातिर चोर हर बार माननीय न्यायालय से अपनी जमानत ले लेता है।
जेल इसके लिए कोई बंदी गृह या कारागार नहीं है ।
बस मौज मस्ती का एक साधन है जहां वह कुछ दिन के लिए पिकनिक मनाने जाता है और कुछ दिन जेल में रहकर फिर एक चोरी का प्लान करके जमानत पर बाहर निकलता है ।
भारत की ट्रेनें इसकी जागीर है रात को सोते हुए यात्री की अटैची उड़ा देना इसके बाएं हाथ का काम है ।
अब तक कितने लोगों की अटैचियां उड़ा चुका है ।
इसका रिकॉर्ड तो किशन चौहान के पास भी नहीं है ।
हां इतना जरूर है कि यह 4 साल में आठ बार पकड़ा जा चुका है पर पुलिस की तकनीकी खामियां व मानवाधिकार के समर्थक किशन चौहान को एक शातिर चोर नहीं राह से लटका हुआ इंसान बताते हैं। प्रयागराज जीआरपी ने फिर पकड़ा है।
कितने दिन जेल में रहेगा यह किशन चौहान को पता नहीं है उसके अधिवक्ता ही बता पाएंगे।
यात्री ट्रेन में बेफिक्र होकर सोता है और सोचता है कि हम टिकट लेकर यात्रा कर रहे हैं और सुरक्षा की जिम्मेदारी तो पुलिस की है ही और ट्रेन में सुरक्षा के लिए 20 डिब्बों मै तैनात चार सिपाही हमारी सुरक्षा के लिए सुपरमैन है 90% लोग जंजीर का भी प्रयोग नहीं करते हैं और इसी का फायदा किशन चौहान को मिलता है।
इसलिए कानपुर से प्रयागराज से गोरखपुर से मुगलसराय ट्रेन के डिब्बे में रखा हुआ यात्रियों का सामान किशन चौहान के बाप की बपौती है।
संपूर्ण ट्रेन और घरों की सुरक्षा की जिम्मेदारी निश्चित ही पुलिस के कंधों पर है पर क्या आपको नहीं लगता है कि आपका भी कोई कर्तव्य है।
एक सामान्य नागरिक होने के नाते ट्रेन में कीमती सामान नगदी ज्वैलरी अटैची में ना रखें अटैची को जंजीर से बांधे अटैची में अच्छे लांक प्रयोग करें जागरूकता से आप अपने नुकसान को बचा सकते है।
अगर आप सुरक्षा के मानक प्रयोग करेंगे तो किशन चौहान अगर आप सुरक्षा के मानक प्रयोग करेंगे तो किशन चौहान जैसे शातिर चोर वर्तमान कानून व्यवस्था का मजाक नहीं उड़ा पाएंगे।

