⚠️ संवेदनशील खबर | गोरखपुर ⚠️
गोरखपुर से एक बेहद दर्दनाक मामला सामने आया है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। 37 वर्षीय कृष्ण मोहन सिंह ने कथित तौर पर फंदे से लटककर आत्महत्या कर ली। घटना से पहले उन्होंने रो-रोकर एक वीडियो बनाया और चार पन्नों का सुसाइड नोट छोड़ा, जिसमें उन्होंने अपनी पीड़ा और कुछ अधिकारियों पर गंभीर आरोपों का जिक्र किया है।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के मुताबिक, कृष्ण मोहन सिंह मूल रूप से कुशीनगर जिले के कुबेर स्थान क्षेत्र के हरैया बुजुर्ग के रहने वाले थे और वर्तमान में गोरखपुर के गुलरिहा इलाके में अपने परिवार के साथ रह रहे थे। वह तीन भाइयों में बीच के थे। उनके परिवार में पत्नी और दो छोटे बच्चे हैं।
बताया जा रहा है कि नौकरी/नियुक्ति से जुड़े मामले में वह काफी समय से परेशान चल रहे थे। सुसाइड नोट में उन्होंने लिखा कि नियुक्ति के नाम पर उनसे बड़ी रकम की मांग की गई। आरोप है कि 20 लाख रुपये की डिमांड की गई थी, जिसमें से उन्होंने कर्ज लेकर 9 लाख रुपये दे दिए थे और बाकी रकम के लिए दबाव बनाया जा रहा था।
परिजनों के अनुसार, पैसे की व्यवस्था के लिए उन्होंने पत्नी के गहने गिरवी रखे और बैंक से भी लोन लिया था। आर्थिक और मानसिक दबाव के कारण वह गहरे तनाव में थे।
घटना कैसे सामने आई?
शनिवार सुबह करीब 6:30 बजे जब काफी देर तक कमरे का दरवाजा नहीं खुला और अंदर से कोई आवाज नहीं आई तो परिजनों को शक हुआ। खिड़की से झांकने पर कुछ साफ दिखाई नहीं दिया। जब दरवाजा तोड़ा गया तो कृष्ण मोहन सिंह फंदे से लटके मिले।
सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। शव को नीचे उतारकर जिला अस्पताल भेजा गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया।
पुलिस क्या कह रही है?
पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। सुसाइड नोट और वीडियो को कब्जे में लेकर उसकी जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की गहराई से जांच की जाएगी और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
परिवार में मातम
इस घटना से परिवार में कोहराम मचा हुआ है।
पत्नी और छोटे बच्चों का रो-रोकर
बुरा हाल है।
इलाके में भी शोक और आक्रोश का माहौल है।
👉 यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि मानसिक और आर्थिक दबाव किस कदर इंसान को तोड़ सकता है।
🙏 अगर आप या आपका कोई परिचित मानसिक तनाव से गुजर रहा है, तो कृपया चुप न रहें। अपने परिवार, दोस्तों या किसी विशेषज्ञ से बात करें। मदद लेना कमजोरी नहीं, समझदारी है

