उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने पूरे प्रदेश की जनता को भावुक कर दिया है। यह मामला महज़ एक पिता और शिक्षक के बीच की बातचीत का नहीं, बल्कि एक सिंगल पेरेंट (एकल पिता) के संघर्ष और अपनी बेटी के प्रति अगाध प्रेम की मार्मिक दास्तां है। स्कूल के क्लासरूम से सामने आए इस दृश्य ने अनुशासन और संवेदनशीलता के बीच की पतली लकीर पर एक बड़ी बहस छेड़ दी है।
घटना के अनुसार, एक मासूम बच्ची कई दिनों से स्कूल जाने के नाम से सहम रही थी। उसने रोते हुए अपने पिता से शिकायत की थी कि स्कूल में उसे शिक्षक की डांट और फटकार का सामना करना पड़ता है। अपनी बेटी की आंखों में डर देखकर पिता सीधे स्कूल जा पहुंचा। वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि पिता अपनी नन्ही बेटी को सीने से लगाकर सुरक्षा का अहसास करा रहा है, जबकि बच्ची बुरी तरह घबराई हुई है। शिक्षक के सामने हाथ जोड़कर पिता का यह कहना—
“मैडम…..
अब इसे मत डांटना…….
इसकी माँ नहीं है……
मैंने इसे अकेले पाल – पोसकर बड़ा किया है”………
इंटरनेट पर लाखों लोगों की आंखों में आंसू ला रहा है।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, बच्ची की माँ के देहांत के बाद उसके पिता ही उसके दुनिया हैं।
ऐसे में स्कूल का सख्त व्यवहार बच्ची के मानसिक कोमल मन पर गहरा आघात कर रहा था।
हालांकि, स्कूल प्रबंधन या संबंधित शिक्षिका की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया है।
लेकिन इस वीडियो ने शिक्षा जगत में ‘चाइल्ड साइकोलॉजी’ (बाल मनोविज्ञान) और शिक्षकों के व्यवहार पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि जो बच्चे पहले ही किसी पारिवारिक आघात (जैसे माता या पिता को खोना) से गुजर रहे हों।
उनके प्रति स्कूल में अतिरिक्त सहानुभूति की आवश्यकता होती है।
गोरखपुर की इस घटना ने स्पष्ट कर दिया है कि शिक्षा केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं होनी चाहिए।
बल्कि उसमें मानवीय संवेदनाओं का समावेश भी अनिवार्य है।

