वह मरा नहीं, आईएएस बन गया :-
साल 2004 ।अलीगढ़ के डोरी नगर निवासी रिंकू सिंह राही ने उत्तर प्रदेश की पीसीएस परीक्षा पास कर ली। आटा चक्की चलाने वाले उनके पिता शिवदान सिंह खुशी से फूले नहीं समाए । रिंकू के परिवार को लगा कि अब खुशियों की बरसात होगी लेकिन भविष्य का किसे पता ?
रिंकू ने मुजफ्फरनगर में जिला समाज कल्याण अधिकारी पद पर नौकरी जॉइन कर ली । युवा अधिकारी में नैतिकता और ईमानदारी का भूत सवार था। उसने देखा कि 100 करोड़ रुपये का स्कालरशिप घोटाला धड़ल्ले से चल रहा है।
उसने इस घोटाले को उजागर किया।स्वभावत: इतनी बड़ी रक़म का घोटाला सरकारी अधिकारियों और बाहरी माफिया की मिलीभगत ही से चल रहा था।
अपराधी माफिया रिंकू राही पर बौखला गये। 26 मार्च 2009 में अपराधियों ने मुजफ्फरनगर के आर्य समाज रोड स्थित ऑफिसर्स कॉलोनी में बैडमिंटन खेल रहे रिंकू राही पर जानलेवा हमला किया।
उनके शरीर में सात गोलियाँ मारी गयी । इनमें तीन उनके चेहरे पर लगी थीं। चेहरा बिगड़ गया। एक आँख जाती रही। एक कान चला गया।
पर रिंकू बच गये।
लेकिन संघर्षों के अंत नहीं हुआ था। इसके बाद घोटाला खोलने के लिए उन्होंने RTI के तहत विभाग से कुछ सूचनाएं मांगी थीं।
लेकिन एक साल का समय दिए जाने के बावजूद उन्हें सूचनाएं नहीं दी गईं। इस पर 26 मार्च 2012 को रिंकू राही ने लखनऊ निदेशालय के बाहर अनशन शुरू कर दिया।
पुलिस ने रिंकू राही को वहां से उठाकर मेंटल हास्पिटल लखनऊ भेज दिया था। रिंकू राही ने बताया कि एक दिन के बाद उन्हें वहां से अलीगढ़ के सरकारी अस्पताल शिफ्ट कर दिया गया।
उन्हें मारने की कोशिश मायावती की बसपा सरकार के समय हुई थी। अखिलेश यादव की समाजवादी सरकार ने उन्हें भ्रष्टाचार पर बहुत ज़्यादा विरोध करने के नाते पागलखाने भेज दिया ।
बाद में सरकार ने उन्हें बहाल किया भदोही जिले में पोस्टिंग दी। इसके बाद कई और जिलों में तैनाती पाई। हापुड़ में जब वे समाज कल्याण अधिकारी थे,
सरकार ने उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से चलाए जा रहे सिविल कोचिंग संस्थान में निदेशक बना दिया। यहां वे छात्रों को पढ़ाते भी थे और सिविल सर्विस की तैयारी कराते।
एक दिन छात्रों ने उन्हीं से कहा कि सर आप भी परीक्षा दीजिए। रिंकू को बात जंच गई। उन्होंने भी तैयारी शुरू कर दी।
रिंकू गोली लगने के बाद विकलांग श्रेणी में आ गये थे तो यूपीएससी में 42 वर्ष की अर्हता आयु का लाभ रिंकू राही को मिल गया। वर्ष 2021 की परीक्षा उनका अंतिम प्रयास थी।इस प्रयास मेंरिंकू ने कमाल कर दिया है।
उन्होंने बीते सोमवार को जारी हुई यूपीएससी-2021 परीक्षा में सफलता हासिल की है। उनकी 683वीं रैंक आई और वे आईएएस बन गए।
बहरहाल, अब रिंकू स्वयं आईएस अधिकारी हैं। अपने आदर्शों और सपनों को क्रियान्वित करें, प्रशासन को ईमानदार ही नहीं, संवेदनशील बनाने में भी जो भूमिका निभा सकते हैं, निभाएँ।
तंत्र और व्यवस्था के भीतर व्यक्तिगत प्रभाव की सीमाएँ होती हैं। लेकिन व्यक्तिगत प्रयत्न भी महत्व रखते हैं, इसमें संदेह नहीं।
रिंकू का जीवन प्रसंग मौत से लड़कर और फिर व्यवस्था से लड़कर अनोखी उपलब्धि का उदाहरण है।
इसमें आस्तिक और धर्मभीरु मन के लिए चमत्कारिक व्याख्या की बड़ी गुंजाइश है लेकिन दूसरी तरफ़ मृत्यु को चुनौती देकर ईमानदारी के लिए संघर्ष की अदम्य प्रेरणा भी है।
मैं इस मृत्युंजय युवक को बधाई और शुभकामना देता हूँ कि वह अपने बड़े ध्येय में सफल हों ।
सादर

