थाने के बाहर पत्थर पर बैठे पिता, और उसी पल बेटे का आया फोन
“पापा मैं DSP बन गया”
अंबेडकरनगर..….
कभी-कभी जिंदगी ऐसे दृश्य रचती है, जो सीधे दिल में उतर जाते हैं—दर्द, संघर्ष और गर्व, तीनों एक ही पल में सिमट आते हैं। यह कहानी भी एक ऐसे ही पल की है, जहां एक पिता का अपमान, बेटे की सफलता के साथ उसी क्षण सम्मान में बदल गया।
उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले के निवासी नीतीश तिवारी ने UP PCS 2022 परीक्षा में सफलता हासिल कर डिप्टी एसपी (DSP) का पद प्राप्त किया है। लेकिन इस उपलब्धि के पीछे की कहानी इसे और भी खास बना देती है।
जिस समय परीक्षा परिणाम घोषित हुआ, उसी वक्त उनके पिता किसी आवश्यक कार्य से थाने पहुंचे थे। वहां मौजूद लोगों ने कुर्सियां खाली होने के बावजूद उन्हें बैठने के लिए नहीं कहा। मजबूर होकर वे थाने के बाहर पड़े एक पत्थर पर बैठ गए। वह पत्थर उस समय सिर्फ बैठने की जगह नहीं था, बल्कि एक आम आदमी की अनदेखी और बेबसी का प्रतीक बन गया था।
तभी अचानक फोन की घंटी बजी…
स्क्रीन पर बेटे का नाम था।
फोन उठाते ही उधर से आवाज आई—
“पापा, मैं DSP बन गया…”
ये शब्द जैसे ही पिता के कानों में पड़े, समय थम सा गया। आंखों से आंसू बह निकले—लेकिन इस बार ये आंसू अपमान के नहीं, बल्कि गर्व और खुशी के थे। जिस पत्थर पर बैठे थे, वही पल उनके जीवन की सबसे बड़ी जीत का साक्षी बन गया। उस क्षण ने जैसे वर्षों की मेहनत, त्याग और संघर्ष को एक ही झटके में सार्थक कर दिया।
नीतीश तिवारी की यह सफलता सिर्फ एक पद या परीक्षा पास करने की कहानी नहीं है, यह उस अटूट विश्वास की मिसाल है जो हर कठिनाई के बावजूद जिंदा रहता है। यह उस बेटे की कहानी है, जिसने अपने पिता के झुके हुए सिर को ऊंचा कर दिया।
आज नीतीश तिवारी जनपद अंबेडकरनगर में डिप्टी एसपी के पद पर कार्यरत हैं। अपनी सादगी, संवेदनशीलता और कर्तव्यनिष्ठा के बल पर वे न सिर्फ कानून व्यवस्था संभाल रहे हैं, बल्कि लोगों के दिलों में भी जगह बना रहे हैं।
यह कहानी हर उस युवा के लिए एक मजबूत संदेश है, जो हालातों से घबराकर रुक जाना चाहता है।
संघर्ष चाहे जितना भी बड़ा क्यों न हो, अगर इरादे अडिग हों, तो एक दिन वही संघर्ष आपकी सबसे बड़ी ताकत बन जाता है।

