“पोस्टमार्टम” Post Mortom क्या हैं?
क्यों किया जाता है… ???
जब किसी की मौत दुर्घटना में होती है,
संदिग्ध स्थिति में होती है या किसी व्यक्ति की डेड बॉडी बरामद होती है तो पुलिस सबसे पहले शव का ‘पंचनामा’ भरकर उसे पी एम यानी “पोस्टमार्टम” के लिए भेजती है।
‘पंचनामा’ एक महत्वपूर्ण कानूनी दस्तावेज़ है, जिसे पुलिस या अधिकारी अपराध, दुर्घटना या संदिग्ध मौत के स्थान पर गवाहों (पंचों) के समक्ष तैयार करते हैं। यह घटना की परिस्थितियों, साक्ष्यों और शव की स्थिति का विस्तृत विवरण दर्ज करता है, जो जांच में सबूत के तौर पर काम आता है-
पंचनामा के उपयोग के उदाहरण
मृत्यु (शव) पंचनामा-
संदिग्ध या अचानक मृत्यु के मामले में शरीर की स्थिति दर्ज करना –
घटनास्थल पंचनामा-
चोरी, हत्या या दुर्घटना स्थल से सबूत जैसे फिंगरप्रिंट,खून के धब्बे एकत्र करना।
तलाशी और जब्ती-
पुलिस द्वारा तलाशी के दौरान मिली वस्तुओं की सूची तैयार करना।
भूमि/राजस्व मामले-
संपत्ति के कब्जे व वारिसों की जानकारी के लिए –
आपके दिमाग में अक्सर यह सवाल जरूर उठा होगा कि आखिर यह पोस्टमार्टम है क्या?
इसे क्यों किया जाता है?
पोस्टमार्टम के तरीके क्या हैं?
उसको करने से पहले किस तरह की औपचारिकताएं की जाती हैं?
पोस्टमार्टम क्या है?
पोस्टमार्टम का संधि विच्छेद करें। यानी इन दोनों शब्दों के अर्थ अलग-अलग जानें तो (Post Mortom) पोस्ट का अर्थ होता है आफ्टर यानी बाद में और मार्टम का अर्थ होता है डेथ। यानी पोस्टमार्टम व्यक्ति के मरने के बाद किया जाता है। यह भी एक तरह की शल्य क्रिया यानी कि सर्जरी ही होती है। पोस्टमार्टम को ‘शव परीक्षा’ Autopsy या post-mortem examination के नाम से भी जाना जाता है।
शव मिलने पर पुलिस पहले पूरी डिटेल्स बनाती है, बॉडी की पहचान कर परिजनों को सूचना देकर उसकी पहचान करवाती है, पूरे आसपास के माहौल का व्याख्यान लिख वहां पड़ी संदिग्ध वस्तुओं जैसे कोई हथियार या रस्सी, ज़हर की सी सी, खून के धब्बे को लेकर सील करती है और असली हालात के और आसपास के फोटो भी लेकर रिकार्ड रखती है! उसके आसपास पड़े कोई काग़ज़ या सूइसाइड नोट , मोबाइल इत्यादी भी कब्जे में लेती है!
उसके बाद पोस्टमार्टम किया जाता है।
पोस्टमार्टम क्यों किया जाता है ?
पोस्टमार्टम इसलिए किया जाता है क्योंकि इससे मौत की वजह का पता लगाया जा सकता है। सामान्य परिस्थितियों में मौत होने पर अक्सर मरने के बाद शव का पोस्टमार्टम नहीं करवाते।
ज्यादातर संदिग्ध हालात में मौत होने की स्थिति में ही पोस्टमार्टम की नौबत आती है। पोस्टमार्टम के बाद ही पता लग पाता है कि मौत किस वक्त हुई, अंदाज़न कब और मृतक की मौत की वजह क्या थी।
पोस्टमार्टम किन मामलों में होना जरुरी है?
आपराधिक मामलों में खास तौर पर पोस्टमार्टम की बहुत अहमियत है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के जरिए ही पुलिस जान पाती है कि मौत की वजह क्या है? फांसी लगाकर आत्महत्या की या मारकर बाद में लटकाया, पानी में डूब कर मरा या मारकर पानी में फैंका है ,
आत्मदाह किया या फिर मारकर जलाने की कोशिश की, मृतक को जहर देकर मारा गया है या उसने अपने आप पिया है !
आत्महत्या करने या फिर उसकी मौत मारपीट की वजह से हुई है?
या फिर मरने का कारण दम घुटना है ?
या मौत कितने घंटे पहले हो चुकी है आदि। मृतक से जुड़े किसी मामले में कोर्ट में पक्ष रखने के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट ही काम आती है।
पोस्टमार्टम के लिए उपयुक्त अवधि क्या है?
किसी भी व्यक्ति के शव का पोस्टमार्टम उसके मरने के बाद अधिकतम छह से दस घंटे के भीतर हो जाना चाहिए। दरअसल, इस अवधि के बाद मृत शरीर में कुछ बदलाव आते हैं, जैसे बाडी का अकड़ जाना या उसका फूल जाना, सड़ जाना। इस वजह से कई बार पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की सही वजह का पता नहीं लग पाता।
डेड बॉडी जब ज्यादा खराब हो जाती है, जैसे कि जंगल में पड़े होने की स्थिति में कीड़े द्वारा या जानवरों,
पक्षियों गिद्धों द्वारा खा लिया जाना या फिर एसिड फेंके जाने की स्थिति में कई अंगों का गल जाना या बहुत पुरानी लाश होने की वजह से उसका सड़ जाना इत्यादि तो भी पोस्टमार्टम करने से भी मौत की वजह पता नहीं चल पाती। ऐसे में शव का बिसरा सुरक्षित रख लिया जाता है।
पोस्टमार्टम में क्या मुश्किल है?
अगर मौत की घटना को काफी समय हो चुका हो या फिर बाडी कई दिनों बाद रिकवर हुई हो तो ऐसे में भी पोस्टमार्टम रिपोर्ट के जरिए मौत के सच तक पहुंच पाना बहुत मुश्किल हो जाता है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट की वजह से कई बार पुलिस की जांच की दिशा बदली और सही आरोपी पकड़ा जा सका।
पोस्टमार्टम किस वक्त होता है?
पोस्टमार्टम ज्यादातर दिन में ही किया जाता है। रात में पोस्टमार्टम नहीं किया जाता है, इसके कई कारण हैं, मसलन बिजली की रोशनी में जैसे खून का रंग बदल जाना। यह लाल की जगह बैंगनी दिखाई पड़ता है। इसके साथ ही चोट का भी रंग बदला हुआ दिखाई देता है। इस वजह से रात में पोस्टमार्टम नहीं किया जाता, क्योंकि फिर इससे व्यक्ति की मौत के सही कारण और समय का पता नहीं चल पाता।
कई बार ऐसा भी होता है कि संदिग्ध हालात में मौत होने पर परिजनों ने शव को जलाने के लिए शमशान घाट या कब्रगाह का रुख किया, लेकिन किसी ने शिकायत कर दी और पुलिस ने मौके पर पहुंचकर अंतिम संस्कार रुकवाया और शव को कब्जे में ले पोस्टमार्टम को भेज दिया!
पोस्टमार्टम दो चरणों में संपन्न होता है। पहले चरण में शरीर के ‘वाह्य’ यानी बाहरी स्थिति का परीक्षण होता है। जैसे कि मृतक के शरीर का विकास कैसा है? मृतक का स्वास्थ्य कैसा है? उसका लिंग कौन सा है? यानी कि वह स्त्री है या पुरुष? उसकी त्वचा का रंग कैसा है? उसके बालों का रंग कैसा है? कहीं उसके शरीर पर कोई चोट का निशान वगैरह तो नहीं है? अगर शव रस्सी से या किसी और वस्तुओं से लटक कर (फांसी) मिला है तो रस्सी का निशान ,खून के,ज़ख्मों के निशान, महिला अगर है तो तो हत्या से पहले रेप तो नहीं हुआ था या महिला गर्भवती थीं, इत्यादि इत्यादी !
शव की बाहरी जांच के बाद फिर शरीर के आंतरिक अंगो की जांच की जाती है।
मृतक के शरीर में कोई अंदरूनी चोट तो नहीं? कहीं कोई हड्डी तो नहीं टूटी है? आंत में सूजन तो नहीं? किसी खास अंग में भीतरी तौर पर कोई विशेष बदलाव तो नहीं है इत्यादी। इस जांच के लिए शरीर को खोला जाता है और पोस्टमार्टम के बाद उसको सिल भी दिया जाता है।
पोस्टमार्टम एक ‘ऑपरेशन’ ही होता है, बस इसमें फर्क इतना होता है कि ऑपरेशन मुख्य रूप से जीवित व्यक्ति का किसी इलाज के लिए किया जाता है, जबकि पोस्टमार्टम मृतक के शरीर के अंगो का परीक्षण करने के लिए किया जाता है। ताकि मौत की असली वजह पता चल सके।
विसरा (Visra) क्या होता है?
जब बात पोस्टमार्टम की आती है तब कहीं ना कहीं विसरा का भी जिक्र जरूर होता है। ज्यादातर आमजन को विसरा के बारे में नहीं पता है। पोस्टमार्टम करने के दौरान शव के विसरल पार्ट यानि किडनी, लीवर, दिल, पेट के अंगों का सैंपल लिया जाता है, जिसे पुलिस के हवाले कर फॉरेंसिक लैब में टेस्ट के लिये भेजा जाता है , इसे ही विसरा कहते हैं … इसी से पता चलता है मृतक ने शराब पी थी, जहर खाया/ या उसे खिलाया गया था, कोई आंतरिक बीमारी या कोई अंदर तक घाव, या कोई गोली या फिर चाकू या हथियार के कोई टुकड़े या निशान तो नहीं हैं …
पोस्ट मार्टम करने के बाद शव कपड़े ढक पुलिस को वापिस सौंप दिया जाता है और वो फिर शव को पूरे काग़ज़ इकट्ठे कर, अंतिम संस्कार के लिए रिश्तेदारों के हवाले कर देते हैं!
पोस्ट मार्टम रिपोर्ट एक अत्यंत महत्वपूर्ण और कानूनी दस्तावेज है जिसका एक एक शब्द, एक एक लाइन महत्वपूर्ण है ,यह रिपोर्ट तैयार कर मोहर सहित दस्तख़त कर कुछ महत्वपूर्ण फोटोज के साथ बंद लिफ़ाफ़े में जिम्मेवार पुलिस अधिकारी को सील बंद कर दी जाती है और बाकायदा उनसे भी दस्तख़त कराकर दी जाती है ..
कुछ संवेदनशील मामलों में वीडियो ग्राफिक रिकार्ड भी सील कर प्रूफ़ के तौर पर रखा जाता है !
फॉरेंसिक लैब से विसरा की रिपोर्ट आने के बाद पोस्ट मार्टम रिपोर्ट को अंतिम रूप दिया जाता है –

