किराएदार लड़की देखने जाने लगा तो मकान मालकिन बोली मुझसे ही शादी कर लो||और फिर|
किराएदार से जीवनसाथी तक: गाजियाबाद की एक अनोखी प्रेम कहानी
उत्तर प्रदेश का गाजियाबाद शहर अपनी भागदौड़ और शोर-शराबे के लिए जाना जाता है।
लेकिन इसी शहर की एक शांत गली में एक ऐसी प्रेम कहानी ने जन्म लिया जिसने कई लोगों के दिलों को छू लिया।
यह कहानी है रेखा, एक खूबसूरत और आत्मनिर्भर मकान मालकिन की, और अनिल, एक सीधा-साधा और मेहनती किराएदार की।
रेखा का एकांत और मजबूरी
रेखा गाजियाबाद में अपने खुद के घर में रहती थी। उसके घर का एक हिस्सा खाली था।
जिसमें दो कमरे और एक छोटा आंगन था।
रेखा की शादी कुछ साल पहले हुई थी, लेकिन उसके जीवन में एक अधूरापन था।
वह अक्सर लोगों से कहती थी कि उसका पति दुबई में नौकरी करता है और वहीं से पैसे भेजता है।
इसी अकेलेपन और सुरक्षा के डर से उसने अपने घर के कमरों को किराए पर देने का फैसला किया था।
एक दिन, उसके पुराने किराएदार अचानक गाँव चले गए और घर फिर से सूना हो गया।
रेखा को अकेले रहने से बहुत डर लगता था।
इसलिए उसने आस-पास के लोगों को बता दिया कि उसे नए किराएदारों की तलाश है।
अनिल का आगमन और पहली मुलाकात
कुछ दिनों बाद, दरवाजे पर दस्तक हुई।
जब रेखा ने दरवाजा खोला, तो सामने एक नौजवान खड़ा था। उसका नाम अनिल था।
अनिल मूल रूप से फर्रुखाबाद का रहने वाला था और गाजियाबाद में नौकरी की तलाश में आया था।
वह सांवले रंग का, तीखे नैन-नक्श वाला और स्वभाव से बहुत ही विनम्र लड़का था।
अनिल ने कहा, “मेम साहब, मुझे पता चला है कि यहाँ कमरा खाली है।
” रेखा ने पहले तो थोड़ा संकोच किया क्योंकि अनिल अकेला था। लेकिन उसकी सादगी देखकर उसने उसे कमरा दिखाने का फैसला किया।
कमरे का किराया 2500 रुपये तय हुआ और 500 रुपये एडवांस। अनिल ने अपनी मजबूरी बताई कि उसके पास अभी एडवांस देने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं हैं।
क्योंकि उसे घर का राशन भी खरीदना है।
रेखा का दिल पसीज गया।
उसने न केवल अनिल को बिना एडवांस के रहने की अनुमति दी, बल्कि अपने स्टोर रूम से पुराना बेड, गद्दे, चादर और यहाँ तक कि गैस चूल्हा और बर्तन भी उसे इस्तेमाल के लिए दे दिए।
अनिल रेखा की इस उदारता से भावुक हो गया और उसने वादा किया कि वह हमेशा उसका आभारी रहेगा।

