बात इसी दिसम्बर 2025 की है। मैं आगरा से गोरखपुर आ रहा था। मेरी बस जो कि आगरा से चली थी गोरखपुर में रात के दो बजे विश्वविद्यालय के छात्रसंघ चौराहे पर छोड़ दी।
मैं वहां से पैदल ही पहले रेलवे बस स्टेशन पर आया, फिर वहां कोई सवारी नहीं मिली तो अपना बैग लादें रेलवे स्टेशन की तरफ आ गया।
तकरीबन ढाई से तीन बजे के बीच मैं रेलवे स्टेशन से धर्मशाला की तरफ आ रहा था। इतने में पीछे सी काले रंग की फार्चुनर में बैठे तकरीबन चार पांच लड़कों ने पीछे से गाड़ी लाकर अचानक से मेरे सामने खड़ी कर दिये। उसमें से एक लड़का नीचे उतरा और मेरा पर्स ले लिया। चूंकि पर्स में बमुश्किल तीन चार सौ रूपये ही थे इसलिए उसने मेरा पर्स वापस कर दिया और मोबाइल ले लिए सब। मैं बहुत मंहगे मोबाइल नहीं यूज करता हूं इसलिए उन लड़कों ने मेरा मोबाइल खोला और मेरा प्रोफाइल चेक करने लगा। एक लड़का मेरा वीडियो भी बनाने में लगा रहा । मैं थोड़ा डर गया था। मन ही मन हनुमान जी को याद करने लगा।
तभी उसमें से एक बदमाश लड़का जो अपने आपको लच्छीपुर का बताया था, शायद वह मुझे पहचान गया और बोला अरे ये तो गुरूजी हैं। मैं इनको जानता हूं। बड़े पावरफुल आदमी है। यह सुनकर मेरे मन में थोड़ी जान आई। मैंने पूछा कैसे जानते हो भाई, वह तपाक से बोला, गुरूजी आपके स्टूडेंट रह चुके हैं हम नवल्स राप्तीनगर में।
मैंने पूछा, “यह ठीक काम कर रहे हो तुम लोग?”
खैर थोड़ी बातचीत के बाद उन सब बदमाशों ने मुझे बा ईज्जत छोड़ तो दिया लेकिन मेरे मन में एक सवाल अब भी है कि सरकार का जो दावा है भयमुक्त, अपराध मुक्त गोरखपुर उसमें कितनी सच्चाई है? यह मैं देख चुका । मैं भुक्तभोगी हैं।
मैं चाहता तो गोरखपुर के धर्मशाला चौकी पर जाकर शिकायत दर्ज करवा सकता था, लेकिन होता कुछ नहीं। गोरखपुर के पुलिस और गोरखपुर के डाक्टरों से अगर आप बच गये तो यमराज भी कुछ नहीं बिगाड़ सकते।
वहां से अपना बैग लेकर मैं धर्मशाला ओवरब्रिज से आगे बढ़ा तो रेलवे प्लेटफार्म नंबर नौ पर जाने वाली राह पर एक चाय वाला मिल गया। मैंने उससे एक कप चाय लिया और अपनी घबड़ाहट मिटाने के लिए पीने लगा। (अमूमन मैं चाय नहीं पीता, न पसंद करता हूं)
चाय वाले ने मेरी हमारे हावभाव में थोड़ी चिंता और घबराहट देख कर पूछा ‘ का बात बा भैया कोनों दिक्कत? “भईया आपके साथ कुछ अनहोनी हो गई है क्या? मैंने उसे पूरी घटना बताया। कि धर्मशाला चौकी से मात्र दस कदम की दूरी पर नशे में धुत्त कुछ लड़कों ने मेरे साथ बदतमीजी कर लूटने का प्रयास किया है।
इस पर वह चाय वाला तपाक से बोला ‘गोल्डेनवा होई और ओकर चेला होइए सन। ई रोज के ड्रामा होय उनहोंने के’ । तब तक मैं गोल्डन का नाम नहीं सुना था न जानता था। लेकिन बाद में पता किया तो पता चला वो एक मंत्री जी का रिश्तेदार है। मैं आश्चर्य चकित था कि मंत्री जी नेतागिरी से पहले घंटो घंटो हमारे पास बैठते और मैं भी मंतरी जी के घर आता जाता था लेकिन इसको कभी देखा नहीं था, आखिर क्यों?
आज समाचार पत्रों और सोशलमीडिया में देखा इस छपरी ने नशे की हालत में गोरखपुर में असुरन पुल पर स्कूटर से जा रहे 22 वर्षीय बीआरडी मेडिकल के MBBS द्वितीय वर्ष के छात्र आकाश पांडे और उनके साथी को अपनी फारचुनर से उड़ा दिया। जिसमें संतकबीर निवासी आकाश पांडे की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि उनके मित्र गंभीर अवस्था में अस्पताल में भर्ती हैं। फारचुनर भी वही था जिसे उस रात वह मेरे सामने तकरीबन सौ से उपर की स्पीड में लाकर अचानक रोका था। पूरा सीन मेरी आंखों के सामने गुजर रहा था।
मैं जानता हूं कि ये मंत्री जी के पत्नी का भतीजा ( सरपुत) है और वो इसको बचाने का पूरा प्रयास करेगा। अपने राजनीतिक रसूख के दम पर अन्य सबूतों से छेड़छाड़ का प्रयास करेगा।
लेकिन मुझे योगी जी पर पूर्ण विश्वाश है कि वो इसे इसके किए अपराध की सजा अवश्य दिलवाएंगे 👏
इन पियक्कड़ बदमाशों की वजह से आज एक घर के इकलौता चिराग हमेशा हमेशा के लिए बुझ गया।
प्रभु श्री हनुमान जी महाराज इस दुःख की घड़ी में पीड़ित परिवार को शक्ति और मृत आत्मा को शांति प्रदान करें 🙏

