कलियुग अपने पूरे यौवन पर है।
सोनिया कि शादी से पहले ही एक प्रेमी उसके मामा के गांव में था। सोनिया मामा के यहां आती जाती थी तो यहीं पर प्रेम प्रसंग बन गया।
फिर सोनिया की शादी हो गई रवि के साथ।
इसके बाद भी मामा के गांव के संजीव उर्फ जीवन से उसके संबंध बने रहे।
थोड़े दिन के बाद उसके पति रवि की मृत्यु हो गई।
लेकिन जीवन से उसका प्रेम चलता रहा।
जीवन ने उससे दूसरी शादी करने की हामी नही भरी।
अब चूंकि सोनिया को आदत पड़ चुकी थी कि एक से अधिक प्रेमी होना ही चाहिए।
तो उसका नया प्रेमी बना उसके मायके वाले गांव का रहने वाला सादिक।
सादिक गोवा में सिलाई का काम करता था और 2-3 महिने में आता था।
उसकी अनुपस्थिति में सोनिया जीवन से मिलती थी।
उसके आने के बाद जीवन की छुट्टी हो जाती थी।
लेकिन अपराध कब तक छिपना था।
एक दिन सादिक को पता चल गया कि यह महिला एक और प्रेमी रखती है।
सादिक ने सोनिया को कहा कि मेरे या जीवन में से किसी एक को चुनना पड़ेगा।
सादिक के सामने सोनिया ने सादिक को ही चुना।
लेकिन सादिक को विश्वास नही था तो उसने कहा – तू मुझसे प्यार करती है तो जीवन को बुला, हम उसकी हत्या करेंगे।
सोनिया को भी लगने लगा था कि जीवन को लंबा समय हो गया, नये को ज्यादा खुश रखना चाहिए।
सोनिया ने जीवन को अपने घर बुला लिया।
यहाँ पहले से सादिक था।
एक अखबार लिखता है कि जीवन को जिस समय मारा गया उस समय वह सोनिया के साथ बिस्तर पर अंतरंग पलो में था।
ऐसी अवस्था मे ही सादिक ने पीछे से उसके गले मे रस्सी डाल दी।
सोनिया भी झट से निकल आयी और जीवन के हाथों को जकड़ लिया।
अंत मे जीवन के जीवन का अंत हो गया।
लाश को कम्बल में लपेटकर फेंक दिया गया।
लेकिन तकनीकी के इस दौर में 24 घण्टे में ही दोनों पकड़े गये।
ससुराल- मायका – पहले प्रेमी का घर – दूसरे प्रेमी का घर।
इन चार घरों की मान मर्यादा को ले डूबी एक औरत की बदचलनी।
जीवन के रास्तों में बहुत फिसलन है, संभलकर चलिये।

