भाजपा विधायक देवेंद्र जैन 72 वर्ष की उम्र अपने बर्थडे पर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के 30 वर्षीय पुत्र महाआर्यन सिंधिया के पैर छूते हैं। अब इसे संस्कार कहें, धर्म कहें, कर्म कहें या फिर कुछ और ही कहें?
यहां प्रथम दृष्टया गलती महाआर्यन की नहीं थी।
लेकिन उसके बाद वह रोक भी सकते थे ।
या…..
कुछ कह भी सकते थे ।
लेकिन ऐसा भी नहीं हुआ इसलिए इसे सम्मान या संस्कार तो कतई नहीं कहा जा सकता है।
हम अपनों से बड़ों का आदरपूर्वक पैर छूना पसंद करते हैं ।
लेकिन वहीं जहां वास्तव में भावना दोहरे अथवा समान सम्मान की हो लेकिन इस मामले तो ऐसा कुछ नहीं दिखाई पड़ता सिवाय मानसिक गुलामी के।
विधायक देवेंद्र जैन भी कोई मामूली व्यक्ति नहीं है।
बल्कि रसूखदार आदमी हैं। सेठजी के नाम से प्रसिद्ध हैं ।
लेकिन सिंधिया एक राजशाही खानदान है।
तो…..
उनके प्रति यह समर्पण किसी और वजहों से दिखता है।
ये बातें इसलिए भी क्योंकि कुछ समय पहले एक सपा पार्टी के ब्राह्मण नेता के बेटे की शादी थी।
अखिलेश यादव भी पहुंच गए।
वर–वधु ने अखिलेश यादव से आशीर्वाद लिया जो कि उम्र के लिहाज़ से ठीक था।
सोशल मीडिया में फिर एक वर्ग ने बहस छेड़ दी कि बस यही दिन देखने बाकी थे।
कहने का अर्थ यह कि सम्मान उम्र का होना चाहिए या पद, पॉवर तथा जाति का?
आज भी कई कुंए के मेंढक कुंए में ही हैं!
आर_पी_विशाल

