आयुर्वेद में कई ऐसे पेड़-पौधे हैं, जिनका इस्तेमाल बीमारियों के इलाज और शरीर की सेहत के लिए किया जाता है। इनमें से एक है अगस्त्य का पेड़, जिसे अगस्ति या गाछ मूंगा भी कहा जाता है। यह पेड़ तेज़ी से उगता है और प्राचीन समय से ही आयुर्वेद में इसका उपयोग किया जाता रहा है। इसे संजीवनी बूटी के समान शक्तिशाली माना जाता है।
✅️ अगस्त्य के पौधे के औषधीय गुण —
अगस्त्य के पेड़ के फूल, पत्ते, जड़, छाल और फल पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। इनमें आयरन पाया जाता है, जो खून की कमी दूर करने में मदद करता है। इसमें मौजूद विटामिन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं। प्रोटीन शरीर को ताकत और ऊर्जा देता है, जबकि कैल्शियम हड्डियों को मजबूत बनाता है। इसके अलावा कार्बोहाइड्रेट शरीर को आवश्यक ऊर्जा प्रदान करता है। इन्हीं गुणों के कारण अगस्त्य के पेड़ को आयुर्वेद में एक संपूर्ण औषधीय पौधा माना गया है।
✅️ अगस्त्य के पौधे के स्वास्थ्य लाभ —
1️⃣ सिरदर्द और जुकाम में राहत :-
इसके फूलों का अर्क सिरदर्द को कम करता है। जुकाम या नाक बंद होने की समस्या में भी यह लाभकारी है।
2️⃣ पेट और पाचन संबंधी फायदे :-
फूलों का अर्क गैस, पेट दर्द और सूजन कम करता है। इसके एंटी अल्सर गुण पेट के अल्सर में मददगार साबित होते हैं।
3️⃣ त्वचा के लिए लाभकारी :-
इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और एंटीबैक्टीरियल गुण स्किन इंफेक्शन और खुजली को दूर करने में मदद करते हैं।
4️⃣ डायबिटीज नियंत्रण :-
इसका अर्क टाइप-2 डायबिटीज में ब्लड शुगर कंट्रोल करने में सहायक है। काढ़ा पीने से भी ब्लड शुगर संतुलित रहता है।
5️⃣ जोड़ों और आर्थराइटिस में मददगार :-
फूलों में एंटी इंफ्लेमेटरी और एंटी आर्थराइटिस गुण पाए जाते हैं। आर्थराइटिस के दौरान होने वाली सूजन और दर्द को कम करता है।
✅️ इस्तेमाल करने का तरीका —
■ अगस्त्य के फूलों का अर्क या पाउडर सुबह खाली पेट लेने से सिरदर्द, जुकाम, गैस और पेट दर्द में लाभ मिलता है।
■ सूखे फूलों का आधा चम्मच पाउडर पानी या दूध के साथ लिया जा सकता है।
■ पत्तों को उबालकर सब्ज़ी के रूप में या उनका रस निकालकर थोड़ी मात्रा में सेवन किया जाता है, जिससे शरीर की सफाई होती है और ताकत मिलती है।
■ जड़ और छाल का काढ़ा या चूर्ण पाचन सुधारने, ब्लड शुगर नियंत्रित करने और जोड़ों के दर्द में सहायक होता है।
🌿 सेवन हमेशा सीमित मात्रा में करें और किसी भी रोग में उपयोग से पहले आयुर्वेदिक विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
लेख,,पंडित,, दिनेश तिवारी कुशीनगर,,,, चरक संहिता से,,,

