थाने का दीवान 15 हजार रिश्वत के साथ गिरफ्तार
बस्ती/यूपी: जनपद के वॉल्टरगंज थाना क्षेत्र में पुलिस की रिश्वतखोरी का गंभीर मामला सामने आया है।
एंटी करप्शन टीम ने कार्रवाई करते हुए वॉल्टरगंज थाने के दीवान राकेश चौहान को ₹15 हजार रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया।
यह कार्रवाई दरौली गांव निवासी मनीष कुमार चौधरी की शिकायत पर की गई।
इंस्पेक्टर जयवर्धन सिंह और दीवान मनीष चौहान पर मुकदमा पंजीकृत किया गया है।
पीड़ित मनीष कुमार चौधरी ने बताया कि उनके पिता मिट्टी के काम से जुड़े हैं और परिवार की कई गाड़ियां ईंट-भट्टों पर काम करती हैं। गाड़ियां अक्सर वॉल्टरगंज थाना क्षेत्र से होकर गुजरती हैं।
आरोप है कि वॉल्टरगंज के थाना प्रभारी ने 10 दिसंबर को उन्हें बुलाकर कहा कि यदि थाना क्षेत्र में गाड़ियां चलानी हैं तो हर गाड़ी के हिसाब से ₹5 हजार प्रतिमाह देने होंगे।
मनीष का कहना है कि उन्होंने थाना प्रभारी से कई बार निवेदन किया कि उनकी आमदनी इतनी नहीं है कि वह इतनी बड़ी रकम दे सकें, लेकिन उनकी एक न सुनी गई।
इसके बाद कुल ₹25 हजार की मांग की गई।
परेशान होकर मनीष ने इसकी शिकायत एंटी करप्शन टीम से की।
शिकायत के सत्यापन के बाद एंटी करप्शन टीम ने जाल बिछाया। तय योजना के तहत मनीष बुधवार को ₹15 हजार लेकर वॉल्टरगंज थाने पहुंचे।
आरोप है कि थाना प्रभारी ने पैसे सीधे न लेकर दीवान राकेश चौहान को देने के निर्देश दिए।
दीवान ने थानाध्यक्ष के आवास में बुलाया और वही पर पैसे की डिमांड की।
जैसे ही राकेश चौहान ने रिश्वत की रकम ली,
एंटी करप्शन टीम ने थाने के अंदर ही उसे गिरफ्तार कर लिया।
कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया।
एंटी करप्शन टीम आरोपी से पूछताछ कर रही है और मामले में अन्य अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
अधिकारियों का कहना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
बताया जा रहा है कि आरोपी दीवान का गैर जनपद पहले की तबादला हो चुका है।
लेकिन पूर्व एसओ उमाशंकर तिवारी ने उन्हें रिलीव नहीं किया। आखिर किस लाभ के लिए राकेश को रिलीव नहीं किया गया।
अब बड़ा सवाल यह के कि थानाध्यक्ष जयवर्धन सिंह थाने पर मौजूद आवास में गिरफ्तारी के बाद अन्य जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है।

