कांग्रेसियों ने मुस्लिम वक्फ बोर्ड को ऐसा हथियार दे दिया कि वह एक भूमाफिया के रूप में काम करने लगे।
तमिलनाडु में हजारों साल पुराने मंदिर को अपनी संपत्ति घोषित कर दिया। देश के अलग-अलग हिस्सों में इन्होंने जहां ऊंगली रखी उसे हथिया लिया।
दिल्ली में भी ऐसा ही हुआ। कई ऐतिहासिक इमारतों को इनके हवाले कर दिया गया। कोई अदालत इन पर हाथ नहीं डालती थी सुप्रीम कोर्ट को भी दर्द तभी हुआ जब इन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट की जमीन पर मस्जिद बना कर कब्जा कर लिया।
99 साल +30 साल के लिए एक मुस्लिम को नमाज पढ़ने के लिए जमीन का टुकड़ा मिला जिसे 2000 में अवैध निर्माण के कारण प्रशासन ने लीज को रद्द कर दिया। जिसके खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में गए लेकिन याचिका रद्द हो गई। SC ने स्टे दे दिया।
उसकी आड़ में इन्होंने 2002 वक्फ बोर्ड में जमीन का रजिस्ट्रेशन करा दिया। SC में केस हारने के बाद भी जमीन नहीं दिया, क्योंकि नियम ही ऐसा है कि मामला अदालत में नहीं, मुस्लिम ट्रिब्यूनल में ही सुना जा सकता है जहां वादी और प्रतिवादी, वकील और जज सभी वक्फ बोर्ड के ही सदस्य होंगे।
SC को देर से ही सही लेकिन समझ में तब आया जब वक्फ बोर्ड उनके घर पर ही दावा ठोक दिया।
अब 3 महीने के भीतर मस्जिद को गिराना है। बाबा की सरकार, गिरना निश्चित है.

