‘मैंने गीता पढ़ी है। मौत से डर नहीं लगता।
जब आदमी बहुत शोषण झेल लेता है, तो डर खत्म हो जाता है। मैं सच बोल रहा हूं। अगर सत्य बोलने पर नौकरी जाती है तो जाए। नौकरी उनकी कृपा से नहीं मिली, मेहनत से मिली है।’
यह कहना है कॉन्स्टेबल सुनील कुमार शुक्ला का।
वर्ष 2015 बैच के सिपाही सुनील ने पुलिस विभाग के भीतर कथित भ्रष्टाचार, अवैध वसूली और कर्मचारियों के शोषण के खिलाफ खुलकर आवाज उठाई है।
इसी मुद्दे पर मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि 10 साल की नौकरी के दौरान उन्होंने सिस्टम के भीतर बहुत कुछ देखा है और अब उनका डर पूरी तरह खत्म हो चुका है। वे हर हाल में सच के साथ खड़े रहेंगे।
अपने इंटरव्यू में सुनील ने गार्ड ड्यूटी लगाने से लेकर मेडिकल बिल, एचआरए और अन्य प्रक्रियाओं में कथित वसूली के आरोप लगाए। उन्होंने कई अधिकारियों पर कहा कि पुलिस विभाग में आज भी अंग्रेजों जैसी व्यवस्था चल रही है। सिपाही का वीडियो सामने आने के बाद लाइन में गणना में लगे 12 पुलिसकर्मियों को हटा दिया गया है।
सिपाही ने बताया कि ये कोई एक दिन का गुस्सा नहीं था। 10 साल से जो देख रहा था, वही धीरे-धीरे जमा होता गया। बहुत सोच-विचार के बाद मैंने वीडियो बनाया। अगर गार्ड ड्यूटी लगवानी है तो पहले पैसा देना पड़ता है। गार्ड कमांडर से लेकर ऊपर तक चैन चलता है। मैंने इसे जमींदारी व्यवस्था कहा, क्योंकि अंग्रेजों के समय जैसे जमींदारों के जरिए वसूली होती थी, वैसे ही यहां सिस्टम चल रहा है।
ड्यूटी लगाने के नाम पर पैसा लिया जाता है। HRA लगवाने के लिए साल में दो बार 100-200 रुपए तक जमा कराने पड़ते हैं। मेडिकल प्रतिपूर्ति में भी प्रतिशत तय होता है। कहीं 10%, कहीं 15%। मेरी पत्नी के इलाज का बिल लगा था, उसमें भी कट की बात हुई। मुझे लगा कि ये गलत है।
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