*वाराणसी में कानून हुआ बेबस? जैतपुरा पुलिस पर कोर्ट–DGP के आदेश रौंदने और भूमाफियाओं संग कब्जे की कोशिश का सनसनीखेज आरोप*
वाराणसी के थाना जैतपुरा क्षेत्र से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आरोप है कि पुलिस, न्यायालय में लंबित मामले के बावजूद, भूमाफियाओं के साथ मिलकर एक पैरालिसिस से पीड़ित वृद्ध के घर पर जबरन कब्जा कराने की कोशिश कर रही है।
सरैया चौकी क्षेत्र के निवासी श्री प्रकाश, जो ब्रेन हेमरेज के बाद से लकवाग्रस्त होकर बिस्तर पर हैं, अपने ही भाई राजकुमार गुप्ता के साथ संपत्ति विवाद में उलझे हैं।
यह मामला सिविल जज (सी.डी.) के न्यायालय में मुकदमा संख्या 805/2013 के तहत विचाराधीन है।
जिसकी अगली सुनवाई 21 अप्रैल 2026 को होनी है।
इसके बावजूद, पीड़ित परिवार का आरोप है कि पुलिस खुलेआम विपक्षी पक्ष का साथ दे रही है।
परिवार के अनुसार, 8 अप्रैल को राजकुमार गुप्ता कथित तौर पर कुछ दबंगों और पुलिस बल के साथ घर पर कब्जा करने पहुंचे। विरोध करने पर परिवार को गंभीर परिणाम भुगतने और फर्जी मुकदमों में फंसाने की धमकी दी गई।
इतना ही नहीं, 10 अप्रैल को फिर से पुलिसकर्मियों के साथ दबाव बनाने की कोशिश की गई, जब घर में केवल महिलाएं मौजूद थीं।
चौंकाने वाली बात यह है कि मुख्यमंत्री पोर्टल (IGRS) पर दर्ज शिकायत में खुद पुलिस ने यह स्वीकार किया है कि मामला न्यायालय में लंबित है।
इसके बावजूद मौके पर पहुंचकर कार्रवाई करना उनकी भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
पीड़ित के बेटे विष्णु कुमार का कहना है कि उनके पिता लगातार मानसिक उत्पीड़न के चलते ब्रेन हेमरेज का शिकार हुए और अब जिंदगी-मौत से जूझ रहे हैं।
परिवार ने ACP चेतगंज, DCP काशी जोन और पुलिस आयुक्त से भी गुहार लगाई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर भारी आक्रोश है।
सवाल उठ रहा है कि जब मामला न्यायालय में विचाराधीन है।
तो……….
पुलिस किस अधिकार से किसी के घर में हस्तक्षेप कर रही है?
क्या कानून के रखवाले ही कानून को चुनौती दे रहे हैं?
पीड़ित परिवार ने अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और मानवाधिकार आयोग से हस्तक्षेप की मांग करते हुए अपनी सुरक्षा और न्याय की गुहार लगाई है।

