बेतिया के पुलिस कप्तान डॉ० शौर्य सुमन: थाना प्रभारी से लेकर एसपी बनने के जांबाज सफर की पूरी कहानी
चिकित्सक की संवेदनशील सोच और भारतीय पुलिस सेवा के ओजस्वी प्रभाव का एक अनूठा संगम देखना हो, तो इसके सबसे सटीक उदाहरण वर्तमान में बेतिया पश्चिम चंपारण के पुलिस अधीक्षक डॉ० शौर्य सुमन हैं। वर्ष 2017 बैच के प्रतिभावान आईपीएस अधिकारी डॉ० शौर्य सुमन ने अपने अब तक के प्रशासनिक और सेवा सफर से यह साबित किया है कि वर्दी केवल रौब का नहीं, बल्कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की सुरक्षा और विश्वास का प्रतीक है। कभी मुंबई के सुप्रसिद्ध जेजे मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर मरीजों की नब्ज टटोलने वाले डॉ० शौर्य सुमन आज एक पुलिस कप्तान के रूप में अपराधियों की नब्ज थाम रहे हैं। उनका यह सफरनामा सिर्फ एक अधिकारी के पद की प्रगति नहीं, बल्कि कर्तव्यपरायणता और दृढ़ इच्छाशक्ति की एक प्रेरणादायक कहानी है।आईपीएस डॉ० शौर्य सुमन का प्रशासनिक सफर शुरुआती दिनों से ही चुनौतियों को अवसरों में बदलने वाला रहा है। प्रशिक्षण के बाद रोहतास जिले में उनकी व्यावहारिक पुलिसिंग की शुरुआत हुई, जहां काराकाट थाना के थाना प्रभारी के रूप में करीब ढाई महीने के संक्षिप्त कार्यकाल में ही उन्होंने बालू माफियाओं और स्थानीय अपराधियों की कमर तोड़ दी। एक आईपीएस अधिकारी का जमीनी स्तर पर थाना प्रभारी के रूप में काम करना और सीधे जनता से जुड़कर अपराधियों पर नकेल कसना उनके भावी नेतृत्व की एक मजबूत नींव साबित हुआ। इसके बाद भारत-नेपाल सीमा से सटे मधुबनी जिले के बेहद संवेदनशील जयनगर अनुमंडल में अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी के रूप में उन्होंने अपनी रणनीतिक कुशलता का लोहा मनवाया। वहां शराबबंदी कानून को धरातल पर उतारने और सीमा पार होने वाली तस्करी पर पूरी तरह अंकुश लगाने में उन्होंने जो अभूतपूर्व कामयाबी हासिल की, उसने महकमे में उनकी एक कड़क और ईमानदार छवि स्थापित कर दी।
एक जिला पुलिस कप्तान के रूप में उनकी पहली स्वतंत्र पोस्टिंग जनवरी 2022 में जमुई जिले में हुई। नक्सलवाद के दंश से जूझ रहे जमुई में उन्होंने सितंबर 2024 तक एक लंबा और बेहद सफल कार्यकाल पूरा किया। डॉ० शौर्य सुमन ने वहां नक्सलियों और अपराधियों के खिलाफ न केवल बेहद आक्रामक और साहसिक अभियान चलाए, बल्कि ‘कम्युनिटी पुलिसिंग’ के माध्यम से पुलिस और आम जनता के बीच की दूरी को पूरी तरह पाट दिया। सुदूर ग्रामीण और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य शिविर लगाकर जब यह आईपीएस अधिकारी खुद मरीजों की जांच करने बैठता, तो जनता की नजरों में खाकी के प्रति सम्मान और गहरा हो जाता। उनके इसी मानवीय दृष्टिकोण का परिणाम था कि जमुई में नक्सली गतिविधियों पर ऐतिहासिक लगाम लगी और वे जन-जन के चहेते बन गए।जमुई में सफलता का एक नया कीर्तिमान स्थापित करने के बाद बिहार सरकार ने सितंबर 2024 में उन्हें बेतिया पुलिस जिले की कमान सौंपी। बेतिया के एसपी के रूप में कार्यभार संभालते ही उन्होंने क्षेत्र में कानून-व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने और पुलिसिंग व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी बनाने की दिशा में निर्णायक कदम उठाए हैं। वे अपराधियों के खिलाफ जहां बज्र के समान कठोर हैं, वहीं आम फरियादियों के लिए न्याय का सबसे सुलभ माध्यम बने हुए हैं।पुलिस मुख्यालय के निर्देशानुसार, उन्होंने नरकटियागंज के शिकारपुर थाने को गोद लिया है, ताकि वहां पुलिसिंग व्यवस्था, जनसुनवाई और ट्रैफिक व्यवस्था को सुदृढ़ किया जा सके। डॉ० शौर्य सुमन का यह शानदार सफर यह साफ बयां करता है कि चाहे स्टेथॉस्कोप हाथ में हो या खाकी का गौरव, उनका एकमात्र संकल्प समाज को भयमुक्त, स्वस्थ और सुरक्षित परिवेश देना है। आज उनके कुशल नेतृत्व में बेतिया पुलिसिंग सफलता और जनता के भरोसे की एक नई इबारत लिख रही है।