ये अपर्णा यादव हैं। अपने मृत पति प्रतीक के चेहरे को एकटक निहार रही हैं। बगल में बेटियां हैं। प्रतीक की मौत पल्मोनरी थ्रॉम्बो एम्बोलिज्म यानी PE से हुई है।
फेफड़ों में थ्रॉम्बो यानी खून का थक्का और एम्बोलिज्म यानी अटकना। यानी फेफड़ों की या फेफड़ों तक जाने वाली नसों में खून का थक्का फंसना। इससे फेफड़ों में खून का फ्लो रुक जाता है। ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। दिल पर दबाव पड़ता है और हार्ट फेलियर या मौत भी हो सकती है। जैसा प्रतीक के साथ हुआ बताया जा रहा।
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सवाल है कि आखिर ये PE है क्या और प्रतीक को हुई कैसे?
दरअसल, एक चीज होती है – DVT यानी डीप वेन थ्रॉम्बोसिस। यानी पैरों या पेल्विस की गहरी नसों में थक्के जमना। DVT में गैंग्रीन तक हो जाता है, कई बार पैर तक काटना पड़ जाता है। जब यही DVT वाले खून के थक्के टूटकर फेफड़ों तक पहुंच जाएं तो फेफड़ों की नसों में भी PE हो सकता है।
हालांकि यही एक वजह नहीं है। लंबे समय तक बेड रेस्ट, सर्जरी, ट्रॉमा या चोट लगने, कैंसर, हार्मोनल दवाएं वगैरह लेने से भी फेफड़ों में एम्बोलिज्म हो सकता है।
इलाज क्या है? कुछ दिनों तक खून को पतला करने वाले ब्लड थिनर यानी एंटीकोएगुलेंट दवाएं दी जाती हैं। गंभीर मामला हो तो ऑपरेशन या सर्जरी भी की जाती है।
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अब गौरतलब बातें दो हैं…
पहली कि 30 अप्रैल को प्रतीक लखनऊ के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में एडमिट हुए थे। उन्हें यही पल्मोनरी थ्रॉम्बो एम्बोलिज्म की दिक्कत बताई गई। 3 दिन बाद उन्हें थोड़ा आराम मिला और वो घर चले गए। बिना छुट्टी लिए।
इस केस में हो सकता है कि प्रतीक ने भरपूर इलाज न लिया हो। PE की दिक्कत रह गई हो, शरीर में थक्के पड़े हों, जो बाद में जानलेवा हो गए। दरअसल, पहली बार का PE पूरी तरह ठीक न हुआ हो तो कुछ रेजिडुअल क्लॉट बचे रह सकते हैं एजे PE दोबारा हो सकता है।
हो सकता है कि प्रतीक की एंटीकोएगुलेंट थेरेपी पूरी न हुई और उन्होंने बिना पूरी डोज लिए अस्पताल से डिस्चार्ज ले लिया।
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दूसरी गौरतलब बात ये है कि प्रतीक की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में पता चला है कि उनके शरीर पर 6 दिन पुराने चोट के निशान हैं।
दरअसल कोई ब्लंट इंजरी हो, तो शरीर में सूजन और खून का थक्का बनने की टेंडेंसी बढ़ जाती है। पोस्ट ट्रॉमेटिक PE कई बार चोट लगने के करीब एक हफ्ते के बाद होता है। अगर पेल्विस एरिया या पैरों के आसपास चोट लगी होती है, तो DVT भी ट्रिगर हो सकता है।
मेरा कहना ये बिल्कुल नहीं है कि प्रतीक के साथ कुछ गलत हुआ है। कई बार PE के पीछे कुछ और भी वजहें हो सकती हैं जैसे खून में ज्यादा थक्का बनने लगना। एक ही जगह इनएक्टिव पड़े रहना। या कोई और इन्फेक्शन हो जाना या स्टीरॉयड का असर वगैरह।
लेकिन फिर भी ये सच है कि प्रतीक अपने शरीर का खूब ख्याल रखने वाले व्यक्ति थे। ऐसे में कई सवाल उठते हैं….
– जब उन्हें एक बार PE की दिक्कत हुई, तो उन्होंने पूरा इलाज क्यों नहीं लिया?
– जब वह इतनी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे, तो अपर्णा उनका खयाल रखने के लिए उनके आसपास क्यों नहीं थीं?
– उनके शरीर पर किस तरह की चोट के निशान थे?
– क्या ये चोट के निशान ऐसे थे, जिनसे PE का खतरा बढ़ता हो?
ये भी ध्यान रखा जाना चाहिए कि 19 जनवरी को प्रतीक ने तलाक का ऐलान करते हुए लिखा था कि इस औरत ने मेरी जिंदगी नर्क कर दी। हालांकि 9 दिन बाद सुलह हो गई थी। प्रतीक ने इंस्टाग्राम पर साथ की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा था, “All is Good”
इस दुखद समय मैं अपर्णा पर कोई आरोप नहीं लगा रहा, न मेरा कोई इरादा है। मेरी संवेदनाएं उनके और उनके पूरे परिवार के साथ हैं।
बस इतना जरूर कहना है कि इस मौत की हाई लेवल जांच होनी चाहिए। ये सामान्य मौत नहीं लगती।
– Shivendra Gaurav

