2 बेटियों ने अपने पिता को खो दिया, एक महिला ने अपना पति खो दिया…
जिस शख्स की मौत हुई उसकी पत्नी एक राजनैतिक महिला थी, महिला आयोग की उपाध्यक्ष…….
कार्यक्रम पहले से तय था कि उस महिला को असम जाना था……
तो वो असम गईं,
पति की तबीयत खराब थी तो उस दिन शाम से रात तक कई बार फोन पर पति से बात की, दोनों बेटियां घर पर ही थीं…
घर का पूरा स्टाफ था…
रात में उस महिला ने अपने ज्योतिष को फोन किया..
जैसे ही मौत की खबर मिली…
वो असम से निकलती है..
सीधे लखनऊ के लिए फ्लाइट नहीं मिली तो पहले दिल्ली पहुंची.. फिर लखनऊ और फिर घर… ।
इस लंबे सफर में 14 साल का वो सफर आंखों के सामने तो होगा ही, दोनों बेटियों का चेहरा, पति का चेहरा बार बार घूम रहा होगा…
लेकिन सोशल मीडिया पर नफरत फैलाने के लिए बैठे लोग कहते हैं कि ‘अपर्णा यादव डायन है’, ‘पति 6 बजे सुबह मरा और ये दोपहर में 3 बजे आ रही हैं’…
इससे भी ज्यादा घटिया लिखा और बोला जा रहा है…
हो सकता है कि अपर्णा यादव में कमियां होंगी, वो एक अच्छी पत्नी नहीं साबित हो पाई होंगी.. या फिर प्रतीक में कमी रही होंगी… या दोनों में कमी रही होंगी… ये सारे सवाल ये सारे आरोप ये सारी घिनौनी बातें सिर्फ इसलिए क्योंकि कुछ दिनों पहले प्रतीक यादव ने सोशल मीडिया पर लिख दिया कि अपर्णा यादव सेल्फिश हैं, उन्होंने परिवार को तोड़ा है…
कितने लोग ऐसे हैं जिनके घरों में रिश्तेदारियों में पड़ोस में ऐसी महिलाएं नहीं हैं… जो परिवार तोड़ने में शामिल रही हैं, क्या हमारे और आपके घरों में आस पास जितनी महिलाएं हैं क्या वो सब परिवारों को साथ लेकर ही चल रही हैं क्या, कितने आदर्श पति और कितनी आदर्श पत्नियां दिखी हैं आपको… कौन ऐसा है जिसमें कोई कमी नहीं है…
लेकिन इसका मतलब ये है कि आप एक महिला को डायन कहने लगेंगे, अपर्णा और प्रतीक की लव मैरिज 14 साल पहले हुई थी… प्रतीक लंबे वक्त से बीमार थे, उनका इलाज चल रहा था… अपर्णा ने खूब पूजा पाठ किया है… घर पर बहुत सी पूजा करवाई, हवन करवाए…
प्रतीक का भारत से लेकर विदेश तक इलाज हुआ… लेकिन शायद आप ये जानते भी नहीं होंगे कि प्रतीक को पल्मोनरी एम्बोलिज्म नाम की बीमारी थी, क्या होती है ये बीमारी.. कितना परेशान करती है गूगल कर लीजिएगा…
अखिलेश यादव को लोग खूब बातें कहते हैं… पोस्टमॉर्टम हाउस पहुंचने वालों में सबसे पहला नाम अखिलेश यादव का है.. वही अखिलेश जो प्रतीक के सौतेले भाई हैं कुछ लोगों की नजरों में… जिनके बारे में कुछ ओछी मानसिकता और जाहिल किस्म के लोग सवाल कर रहे थे कि अखिलेश प्रतीक को अस्पताल देखने गए थे या नहीं…
डिंपल यादव प्रतीक की भाभी हैं वो भी पहुंचीं.. पूरा परिवार पहुंचा… हां, ये सच है कि अपर्णा ने अपनी राजनैतिक महत्वाकांक्षाओं के लिए खुद को समाजवादी पार्टी से अलग किया.. बहुत हद तक परिवार से भी दूरी बनाई… लेकिन कभी परिवार के लोगों का अनादर नहीं किया..
बहुत से लोगों को देख रहा हूं कि प्रतीक की मौत को वो प्री प्लांड मर्डर बता रहे हैं, बिना कुछ जाने बिना कोई पड़ताल किए… एक महिला आज अपने सबसे मुश्किल दौर में हैं, उसने अपने पति को खोया है…
अपनी बेटियों के पिता को खोया है.. उस परिवार की तकलीफ को हम आप नहीं समझ सकते… लेकिन कम से कम हल्की बातें लिखकर अपनी हल्की मानसिकता और घटिया सोच का परिचय तो ना दें..

