7 मई रवीन्द्र जयंती पर विशेष
काव्य और साहित्य के अनमोल
*************************
नक्षत्र रवीन्द्र नाथ टैगोर
********************
. – दीपक चक्रवर्ती निशांत
रवीन्द्रनाथ टैगोर मात्र कवि साहित्यकार, शिक्षाविद ही नही सच्चे देशभक्त भी थे। अपने साहित्यिक प्रतिभा से उन्होंने विश्व के मानचित्र पर भारतवर्ष का रेखांकित किया था।रवीन्द्रनाथ एक असाधारण प्रतिभा के धनी थे और प्रकृति को अपना सहचरि मानते थे और प्रकृति के सानिध्य में शिक्षा को विकसित करने के उद्देश्य से उन्होंने बंगाल के बोलपुर में शान्तिनिकेतन की स्थापना किया। गुरुदेव शान्तिनिकेतन मे प्राकृतिक वातावरण में शिक्षादान के साथ साथ काव्य रचना करते थे। उन्होंने कई सौ गीतों की रचना की एवं उसे सुरों से सजाया। काव्य साहित्य साधना के साथ साथ उन्होंने स्वाधीनता आन्दोलन के समय अपनी कविताओं और गीतों से स्वतंत्रता सेनानियों की चेतना को जगाने का काम भी किया। उनके देशप्रेम से महात्मा गांधी, अरविंद घोष, नेताजी सुभाष भी प्रभावित थे। महात्मा गांधी ने ही सर्वप्रथम उन्हें गुरुदेव कहा था।
. रवीन्द्रनाथ विश्व वरेण्य कवि थे। 1913 में उन्हें गीतांजलि काव्य ग्रथ के लिए नोबल पुरस्कार मिला था। उनके द्वारा लिखित रवीन्द्र संगीत जन जन के लिए प्रेरणा दायक है।
उन्होंने लिखा -” जीवन एक सरिता है, अपने कर्मों की नाँव बराबर खेते चलो,यही तुम्हारा कार्य है और यही ईश्वर या अल्लाह की इच्छा है”।
उनका लिखा गीत ” एकला चलो रे ” आज भी प्रासंगिक है रवीन्द्रनाथ टैगोर की कविता और गीत देशवासियों को सदैव अनुप्राणित करती रहेगी।
जन्म जयंती पर उन्हें कोटिशः नमन।