आज ड्यूटी के दौरान एक अलग ही अनुभव हुआ।
फोटो में दिख रहा यह कपल रेलवे सुरक्षा बल के 3-4 जवानों से पूछते हुए मेरे बारे में जानकारी ले रहा था।
वे मोबाइल में मेरा वीडियो दिखाकर कह रहे थे —
“हमें वीडियो में जो साहब दिख रहे हैं, उनसे मिलना है……
उनके साथ एक सेल्फी लेनी है।”
वे हमारे इंचार्ज इंस्पेक्टर सुनील कुमार यादव साहब (Sunil Yadav) से भी मिले और मुझसे मिलने की इच्छा जताई।
इंस्पेक्टर साहब ने मुझे कॉल कर बताया कि — “संतोष, आप आ जाइए……
कुछ लोग आपसे मिलने आए हैं।”
जब मैं कोच से बाहर आया तो देखा कि वह महिला रो रही थी।
गाँव में उनके परिवार में किसी का देहांत हो गया था।
उनके बुजुर्ग माता-पिता को भी पुणे से दानापुर जानेवाली स्पेशल ट्रेन से जाना था।
लेकिन उनका रिज़र्वेशन नहीं होने के कारण उन्हें बैठने की जगह नहीं मिल रही थी।
रोते-रोते वह महिला बोली —
“सर, हमनें आपके कई वीडियो देखे है जिसमें आप ज़रूरतमंद को जनरल डिब्बे में जगह करके देते है…. और हमे विश्वास है कि अगर कोई हमारे बूढ़े माता-पिता को जगह दिला सकता है।
तो वो आप ही हैं…….
इसलिए हम आपको ढूँढ रहे थे।”
उनकी आँखों में विश्वास था……
और उस विश्वास को निभाना मेरा कर्तव्य था।
मैंने तुरंत एक कोच में उनके बुजुर्ग माता-पिता के बैठने की व्यवस्था करवाई।
सेल्फी लेते समय भी उनकी आँखें नम थीं।
मैंने हल्के से मुस्कुराते हुए कहा —
“अगर आप रोते रहोगी तो हमारी सेल्फी अच्छी नहीं आएगी…”
और उस पल उनके चेहरे पर हल्की सी मुस्कान आ गई।
मैं उनके घर के दुख को कम नहीं कर सका…
लेकिन दो जरूरतमंद बुजुर्गों को सफर में सम्मानपूर्वक जगह देकर शायद उनके मन का बोझ थोड़ा जरूर हल्का कर पाया।
वर्दी की असली ताकत रौब में नहीं….. संवेदनशीलता में होती है।
जनता का विश्वास ही रेलवे सुरक्षा बल की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है और हम उस ज़िम्मेदारी को निभाने के लिए कटिबद्ध है, जय हिन्द 🙏

