विनोद उपाध्याय की सुनियोजित हत्या हुई…..
विनोद उपाध्याय कोई अपराधी नहीं, समाजसेवी थे ।
उन्होंने अपनों के लिए झगड़ा किया, अगर कोई उनके अपनों को परेशान करता था तो उससे उनका झगड़ा होता था ।
बे ओहियाद किसी से झगड़ा नहीं करते थे।
यूपी में सुशासन की आड़ में कैसे दबंग ब्राह्मण मारे और खत्म किए जा रहे गोरखपुर के विनोद उपाध्याय की हत्या इसका उदाहरण है….
विनोद उपध्याय भी उसी तरह के बाहुबली थे जैसे ब्रजेश सिंह, धनंजय सिंह, विनीत सिंह, सोनू. मोनू और और योगी के बाक़ी सजातीय…….
पूर्वाचल में स्वाभिमान के साथ जिन्दा रहने के लिए लड़ना होता है.. वो भी स्वाभिमान के लिए लड़े……
नेपाल के माफिया जीतनारायण मिश्रा ने जेल में अपमान किया तो उसे मारा……
एक अपराधी लाल बहादुर यादव ने उनके दो साथियों की हत्या की तो उसे मारा.. कोई पेशेवर अपराधी नहीं थे……
लेकिन योगी सरकार ने अपराधी घोषित कर उनका एनकाउंटर करा दिया……
इसलिए कि योगी को गोरखपुर में सीना चौडाकर घूमने वाला कोई ब्राह्मण बर्दाश्त नहीं…….
योगी की निजी खुन्नस थी……
विनोद उपाध्याय ने योगी की हिन्दू युवा वाहिनी के नेता सुनील सिंह को बीच बाजार पीटा था……
विनोद उपाध्याय हरिशंकर तिवारी के भी करीबी थे……
इसलिए स्पेशल ठाकुर फ़ोर्स ने हत्या कर दी और नाम दिया एनकाउंटर का…….
विनोद को इस अंजाम तक पहुँचाने के लिए उन पर एक लाख का इनाम घोषित किया गया…
लेख – कमलेश ओझा कि कलम से……

