पंडित अवसरवादी होते हैं।बनिये मां के कंगन रख लेते हैं।
ठाकुर अत्याचारी होते हैं।
अब ये चीजें बॉलीवुड से निकलकर हमारी प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्रों तक पहुंच गई हैं।
बड़ी मुश्किल से अभियान चलाकर फ़िल्म इंडस्ट्री वालो को ठीक किया था।
लेकिन अब ये सरकारी बाबुओं का क्या।
ऐसा लगता है जैसे इन लोगों ने देश के सबसे लोकप्रिय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ख़िलाफ़ सुपारी ले रखी है।
सीएम योगी की पहचान भगवा है।गोरखनाथ मंदिर द्वारा संचालित शैक्षणिक-स्वास्थ्य संस्थानों के लाभार्थियों की जाति नहीं देखी जाती।
सांसद रहते हुए सीएम योगी ने हिन्दुओं के लिए जमकर संघर्ष किया,कई बार उनपर हमले भी हुए।
सीएम बनने के बाद भी सरकारी योजनाओं का लाभ उन्होंने उन तक भी बिना किसी भेदभाव के पहुंचाया।
जिनके बारे में कहा जाता था कि बाबा इनके दुश्मन हैं। अपराधियों के एनकाउंटर के वक़्त भी जाति नहीं देखी गई।
उस उत्तर प्रदेश से अगर इस तरह की करतूत सामने आ रही है तो ये शर्म की बात है।

