‘सूट-बूट’ वाले डिजिटल डकैत: जलालाबाद के खंडहरों में चल रही थी ‘शेयर बाजार’ की फर्जी दुकान
शाहजहांपुर – जलालाबाद की गलियों में सन्नाटा था, लेकिन एक पुराने खंडहर में ‘नोट छापने’
की मशीनें चल रही थीं।
यह मशीनें लोहे की नहीं, बल्कि सिलिकॉन चिप्स और इंटरनेट के तारों से बुनी गई थीं।
शाहजहांपुर पुलिस ने जब इस ‘हाईटेक तिलिस्म’ को तोड़ा, तो नजारा देख आंखें फटी की फटी रह गईं।
69 लैपटॉप, चमचमाती महिंद्रा थार और डिग्रियां एमबीए-एमकॉम की… लेकिन काम?
देश भर के लोगों की गाढ़ी कमाई पर ‘डिजिटल डाका’ डालना।
एसपी राजेश द्विवेदी और एसपी सिटी देवेंद्र कुमार की टीम ने शुक्रवार को एक ऐसे सिंडिकेट का पर्दाफाश किया, जो शेयर बाजार में मुनाफे का सपना बेचकर लोगों को कंगाल कर रहा था।
जलालाबाद के रुस्तमपुर में मंडी गेट के आगे जिस जगह को लोग खंडहर समझते थे, वहां ‘SLG Digi Pvt. Ltd.’ के नाम पर ठगी का एक पूरा कॉर्पोरेट ऑफिस चल रहा था।
इस गैंग का सरगना कोई अनपढ़ अपराधी नहीं, बल्कि एमबीए पास टिंकल गुप्ता है।
उसके साथी भी कम नहीं कोई एमकॉम है तो कोई बीकॉम।
जिस उम्र में युवाओं को देश की अर्थव्यवस्था सुधारनी चाहिए थी, ये युवा अपनी तालीम का इस्तेमाल ‘ग्लोबल ट्रेड कंपनी’ जैसी फर्जी एप बनाकर लोगों को लूटने में कर रहे थे।
पुलिस की तफ्तीश में जो कहानी निकलकर आई, वह डराने वाली है।
ये शातिर अपराधी ’77DATA.NET’ जैसी वेबसाइटों से महज 5000 रुपये में 1000 लोगों का डेटा खरीदते थे।
फिर शुरू होता था फोन घनघनाने का खेल। “हेलो सर, शेयर मार्केट में पैसा लगाइए,
तीन गुना मुनाफा होगा……. और जो इस जाल में फंसा, उसका पैसा सीधे फर्जी खातों में और फिर हवा-हवाई।
अपराधियों को लगा कि डिजिटल दुनिया में उनका कोई ‘फुटप्रिंट’ नहीं होगा।
लेकिन पुलिस का ‘प्रतिबिंब’ पोर्टल उन पर भारी पड़ गया।
एक संदिग्ध नंबर की लोकेशन जब जलालाबाद के उस वीराने में मिली, तो सीओ साइबर शुभम वर्मा और इंस्पेक्टर अनूप शर्मा की टीम ने जाल बिछा दिया।
बरामदगी देख पुलिस भी हैरान,पुलिस ने जब रेड मारी, तो वहां का नजारा किसी आईटी कंपनी जैसा था।
👉69 लैपटॉप (जिन पर ठगी की स्क्रिप्ट लिखी जा रही थी)
👉26 नए सिम कार्ड (जो अगला शिकार फंसाने को तैयार थे)
👉 एक महिंद्रा थार और 4 बाइकें (ठगी की कमाई का सबूत)
👉 10 मोबाइल, चेकबुक और वाई-फाई के 4 सेटअप।
सलाखों के पीछे ‘फ्यूचर के मैनेजर’
गिरफ्तार अभियुक्तों में सरगना टिंकल गुप्ता (31) के अलावा प्रांजल सक्सेना, निहाल सक्सेना, दीपांशु, सिद्धांत मिश्रा और रोहित राठौर शामिल हैं।
ये सभी जलालाबाद के ही रहने वाले हैं।
पुलिस ने इन पर बीएनएस की धारा 318(4), 338, 336(3) समेत आईटी एक्ट की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।
इस शानदार खुलासे पर एसपी ने पुलिस टीम को 25,000 रुपये का इनाम घोषित किया है।
लेकिन बड़ा सवाल यह है कि आखिर हमारे समाज का पढ़ा-लिखा युवा शॉर्टकट के चक्कर में ‘क्राइम के दलदल’ में क्यों उतर रहा है?
फिलहाल, जलालाबाद का यह फर्जी कॉल सेंटर अब खामोश है और इसके ‘सीईओ’ जेल की सलाखों के पीछे।
रोचक अग्निहोत्री (पत्रकार, शाहजहांपुर)

