(नौकरशाही पर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी, पुलिस अधिकारियों के रवैये पर चीफ जस्टिस ने खड़े किए सवाल*)
सुप्रीम कोर्ट के चीफ चीफ जस्टिस ने ब्यूरोक्रेट्स खासकर पुलिस अधिकारियों के व्यवहार पर सख्त टिप्पणी की है। इससे पहले भी चीफ जस्टिस पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठा चुके हैं।सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने देश भर में ब्यूरोक्रेट्स खासकर पुलिस अधिकारियों के व्यवहार पर आपत्ति जाहिर की है। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एनवी रमना की अगुवाई वाली बेंच ने शुक्रवार कहा कि देश भर के ब्यूरोक्रेट्स खासकर पुलिस अधिकारियों का जो व्यवहार है उस पर मेरी गहरी आपत्ति है। चीफ जस्टिस ने इशारा किया कि वह ऐसे पुलिस अधिकारियों और ब्यूरोक्रेट्स के खिलाफ प्रताड़ना की शिकायत के परीक्षण के लिए स्टैंडिंग कमिटी बनाने की सोच रहे थे।
स्टैंडिंग कमिटी में हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस अगुवाई करेंगे। चीफ जस्टिस ने कहा कि इस बारे में हमने सोचा था लेकिन अभी इस फैसले को हम बचाकर रख रहे हैं। छत्तीसगढ़ के सस्पेंड एडीजे जीपी सिंह की अर्जी पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने उक्त टिप्पणी की है। सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर प्रोटेक्शन की मांग की हुई है।
पुलिस को लेकर पहले भी कह चुके हैं यह बात
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने 26 मार्च को कहा था कि रूलिंग पार्टी के साथ पुलिस अधिकारी होते हैं लेकिन जब सत्ता परिवर्तन होता है तो विपक्ष सत्ता में आते ही ऐसे पुलिस अधिकारियों को निशाना बनाना शुरू करते हैं। चीफ जस्टिस एनवी रमना ने कहा कि देश में ये खेदजनक स्थिति है। अदालत ने कहा कि जैसे ही सत्ता परिवर्तन होता है तो राजद्रोह जैसे केस फाइल करने का चलन हो गया है जो परेशान करने वाला ट्रेंड है।
हरिंदर कौशल सवांदाता

